स्थाई लोक अदालत, दौसा में लंबित प्रार्थना पत्रों की सुनवाई के दौरान अदालत ने नगरपरिषद के रवैये पर सख्त रुख अपनाया। पूर्णकालिक अध्यक्ष राजेश चंद्र गुप्ता तथा सदस्य अशोक कुमार शर्मा व सुरेश कुमार गोयल की पीठ ने प्रार्थी गोविन्द सहाय, कुनती देवी और रामदयाल के प्रकरणों पर सुनवाई की। अदालत ने पाया कि बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद नगरपरिषद की ओर से कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इस पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने प्रत्येक परिवाद पर 500 रुपये का कॉस्ट (हर्जाना) लगाते हुए अगली पेशी तक जवाब दाखिल करने के आदेश दिए। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दौसा के माध्यम से प्रार्थियों ने जन उपयोगी सेवाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए नगरपरिषद के खिलाफ परिवाद दायर किए थे। प्रकरण में आयुक्त कमलेश कुमार मीना को व्यक्तिगत रूप से तलब कर जवाब देने के निर्देश भी दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। परिवादी पक्ष की ओर से चीफ लीगल एड डिफेंस काउन्सिल अधिवक्ता जितेन्द्र मुद्गल ने पैरवी की।
