पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए कथित जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार मुश्ताक ने पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इंटेलिजेंस की पूछताछ में मुश्ताक ने बताया कि वह पिछले 24 महीनों से पाकिस्तान में बैठे अपनी बुआ के लड़के नजीर और आईएसआई (ISI) हैंडलर खालिद के सीधे संपर्क में था। दोनों ने उसका माइंडवॉश किया और पैसे का लालच देकर चंगुल में फंसाया था। जैसलमेर सेक्टर में सीमा सुरक्षा बल (BSF) की गाड़ियों की आवाजाही और सामरिक लिहाज से बेहद संवेदनशील सड़कों की वीडियो-तस्वीरें वॉट्सऐप के जरिए नजीर को भेज रहा था। इसके बदले उसके बैंक अकाउंट में करीब 30 हजार रुपए का भुगतान किया गया था। फिलहाल, 5 दिन की रिमांड में आरोपी से संयुक्त पूछताछ टीम (JIC) की पूछताछ जारी है। इमोशनल और धार्मिक कार्ड खेलकर बदला माइंडसेट
पूछताछ में सामने आया कि आईएसआई का हैंडलर खालिद, भारत में केवल उन्हीं लोगों को टारगेट करता है, जिनके पारिवारिक रिश्तेदार पाकिस्तान में रह रहे हैं। मुश्ताक की मौसी और बुआ का परिवार पाकिस्तान में है। सोशल मीडिया के जरिए मुश्ताक के चचेरे भाई नजीर ने पहले दो साल तक लगातार बातचीत कर उसका माइंडवॉश किया। नजीर ने मुश्ताक के दिमाग में ‘भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार’ का झूठा नैरेटिव सेट किया। जब मुश्ताक पूरी तरह उनके प्रभाव में आ गया, तो नजीर ने उसकी बात आईएसआई के मुख्य हैंडलर खालिद से कराई और उसे पैसों का लालच देकर जासूसी करवाना शुरू कर दिया। लोकल बैंक खातों ने खड़े किए कई बड़े सवाल
मुश्ताक को जासूसी के बदले जो रकम मिली, वह किसी विदेशी खाते से नहीं बल्कि भारत के ही अलग-अलग बैंक खातों से ट्रांसफर की गई थी। अब इंटेलिजेंस इन बैंक खातों के मालिकों की डिटेल खंगाल रही है। आशंका है कि देश के भीतर ही आईएसआई के कुछ और मददगार या स्लीपर सेल सक्रिय हैं, जो स्थानीय स्तर पर कैश फ्लो को मेंटेन कर रहे हैं। खारिया गांव से जुड़े रूट्स की होगी ऑन-स्पॉट जांच
मुश्ताक अली का गांव ‘खारिया’ अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के बिल्कुल पास है। सीआईडी की टीम आरोपी को साथ लेकर उन तमाम रास्तों, पुलों और सैन्य ठिकानों पर जा रही है, जहां खड़े होकर उसने वीडियो बनाए थे। यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या इस जासूसी रैकेट में सीमावर्ती क्षेत्र के कुछ अन्य स्थानीय गाइड या चरवाहे भी मुश्ताक की मदद कर रहे थे। मोबाइल में मिले थे दो संदिग्ध नंबर मुश्ताक के मोबाइल फोन से दो संदिग्ध नंबर भी मिले हैं। एजेंसियों के अनुसार यहीं नंबर खालिद और नजीर अहमद के थे। पूछताछ में सामने आया है कि यही लोग मुश्ताक को गूगल मैप कैमरा और अन्य मोबाइल एप्लीकेशन के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दे रहे थे। नाचना से हिरासत, बाद में गिरफ्तारी बता दें कि राजस्थान इंटेलिजेंस को मिले खुफिया इनपुट के आधार पर 11 जून को जैसलमेर के सीमावर्ती नाचना क्षेत्र से मुश्ताक को हिरासत में लिया गया था। कई दिनों की पूछताछ और साक्ष्य जुटाने के बाद उसकी गिरफ्तारी दर्ज की गई। बाद में उसे जयपुर की अदालत में पेश किया गया, जहां से पूछताछ के लिए पांच दिन की रिमांड मंजूर की गई। ये खबर भी पढ़िए… चाय की दुकान खोलकर पाकिस्तान के लिए करता था जासूसी,गिरफ्तार:राजस्थान में सेना के मूवमेंट के वीडियो भेजता, बॉर्डर की सड़क पर रखता था निगरानी