राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने कहा- शेखावाटी और राजस्थान की जनता का प्यार मुझे सत्ता से दूर लेकर जा रहा है। जब भी सत्ता मेरे करीब होती है, तो इनका प्यार उमड़ पड़ता है। लोग कहते हैं- भाईसाहब, आपकी सरकार बना देंगे… आ जाओ, आंदोलन शुरू हो गया है।’ इसलिए मैं सत्ता से दूर हो जाता हूं, वरना मैं तो कब का ही सरकार में शामिल हो जाता (घुस जाता)। उन्होंने आगे कहा- आज राजस्थान में कई लोगों के काम मेरे नाम से हो रहे हैं। कोई कहता है कि ‘हनुमान जी यह कर देंगे’, इसलिए किसी के दो ट्रांसफर कर दिए जाते हैं, किसी को राज्यसभा में भेज दिया जाता है, तो किसी को उपराष्ट्रपति बना दिया जाता है। मेरे नाम से लोगों का भला ही हो रहा है। लेकिन अपना नुकसान मैं खुद ही कर रहा हूं, वरना अब तक तीन-चार बार मंत्री बनकर बड़ा नेता बन गया होता। मैं मंत्रियों को नेता इसलिए नहीं मानता क्योंकि मंत्री अपने खुद के महकमे (विभाग) में सेक्रेटरी (सचिव) तक चेंज नहीं करवा सकते। राजस्थान के दो-तीन मंत्रियों की यही पीड़ा है। वे मुझे बोलते हैं कि ‘आप उस कमरे में लड़के (छोरे) भेजकर धमकवा दो।’ वहीं, सरकार द्वारा उनकी सिक्योरिटी कम किए जाने के सवाल पर बेनीवाल ने कहा कि सरकार तो यही चाहती है कि मुझे कुछ हो जाए। हनुमान बेनीवाल शुक्रवार शाम को बीकानेर जाते समय सीकर में रुके थे। सीकर के सर्किट हाउस में कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान ये बातें कहीं। बेनीवाल ने मीडिया से कही ये 6 अहम बातें… 1. विधानसभा चुनाव में हमारा रिजल्ट ज्यादा बढ़िया नहीं रहा
बेनीवाल ने कहा-आज देश में विपक्ष कहां बचा है? लोग ईडी (ED) और सीबीआई (CBI) के डर से कांपते हैं। यदि दोपहर में कोई नेता तेज आवाज में बयान दे देता है, तो शाम को भाजपा नेताओं से पूछता है कि ‘कुछ गलत तो नहीं बोला ना? अगर गलत बोला है तो वापस ठीक करवा देता हूं।’ बेनीवाल ने घोषणा की कि राजस्थान में जल्द ही राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) अपना छात्र संगठन लॉन्च करेगी। विधानसभा चुनाव में हमारा रिजल्ट ज्यादा बढ़िया नहीं रहा, जिसका एक बड़ा कारण आर्थिक तंगी भी है। हमने चुनाव के लिए किसी से एक भी पैसा चंदा नहीं लिया। इसके अलावा, गलत समय पर रथयात्रा निकालना सहित कई ऐसे कारण रहे, जिनकी वजह से हम चुनाव नहीं जीत पाए। 2. शेखावाटी से मेरा पुराना नाता है
हनुमान बेनीवाल ने कहा-शेखावाटी से मेरा पुराना नाता है। छात्रसंघ चुनाव के समय से ही यहां के युवा मुझे आगे बढ़ाने में मेरे साथ रहे हैं। उन्हीं की बदौलत मैं राजस्थान विश्वविद्यालय (RU) का अध्यक्ष बना था। राजस्थान की सत्ता भी उसी तरफ जाएगी, जिस तरफ शेखावाटी जाएगा। एजुकेशन (शिक्षा) के मामले में आज सीकर कोटा को टक्कर दे रहा है और कहीं न कहीं उससे आगे भी निकल चुका है। उन्होंने कहा-हमारी पार्टी में भी बड़ी संख्या में सीकर के युवा शामिल हैं। खाटूश्यामजी में करण कुमावत पर हुए हमले के मामले में भाजपा के नेता आरोपियों को बचा रहे हैं, लेकिन जल्द ही सभी आरोपी पकड़े जाएंगे। 3. बढ़ता नशा राजस्थान को गलत दिशा में ले जा रहा है
बेनीवाल ने चिंता जताते हुए कहा-शेखावाटी और मारवाड़ के अंदर बढ़ता अपराध और बढ़ता नशा राजस्थान को गलत दिशा में ले जा रहा है। मारवाड़ में एमडी (MD) और जो भी सिंथेटिक नशे आ रहे हैं, उनके पीछे राजनीतिक पार्टियों के नेता, विधायक (MLA) और उनके परिवार कहीं न कहीं शामिल हैं। ये लोग राजस्थान के युवाओं को बर्बाद कर रहे हैं। राजस्थान में लगातार सिंथेटिक नशे की फैक्ट्रियां पकड़ी जा रही हैं। आज राजस्थान नशे के मामले में पंजाब के बाद देश में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। इनकी कमर तोड़ना बेहद जरूरी है।”
4. हम कभी सत्ता में नहीं रहे, पेपर लीक से बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं
बेनीवाल ने कहा- हम कभी सत्ता में नहीं रहे। यहां कभी कांग्रेस तो कभी बीजेपी की सरकार रही। कभी किसी ने पेपर लीक करवाया तो कभी किसी ने। राहुल गांधी भी पेपर की चिंता करने कोटा आते हैं, लेकिन जो बाकी पेपर लीक हुए, उन पर कोई बात नहीं करता। नीट (NEET) का जो पेपर लीक हुआ, उसका सीकर से कनेक्शन सामने आया, जिससे हम शर्मसार हुए हैं। परीक्षा रद्द होने के बाद जिस तरह से बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं, वह बहुत चिंता का विषय है। यह पूरी तरह से सिस्टम का फेलियर है और इसके लिए सरकार जिम्मेदार है। नीट पेपर लीक की जांच सीबीआई (CBI) से करवाने की बात बीजेपी ने कही थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद ऐसा नहीं हुआ। इसके अलावा आरपीएससी (RPSC) के पुनर्गठन का वादा भी हवा हो गया। भाजपा सरकार ने बच्चों को गुमराह करने के अलावा कोई काम नहीं किया। इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया था और अब मोदी-शाह ने अघोषित आपातकाल को परमानेंट लगा दिया है। जो इनके खिलाफ बोलेगा, उसके यहां ईडी और सीबीआई भेजकर दल बदलवा दिया जाएगा। आज राजनेता केवल अपना-अपना व्यापार बढ़ाने के लिए राजनीति में आ रहे हैं। ऐसे बहुत कम नेता बचे हैं जो सड़क पर सत्ता छोड़कर जनता के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। राजस्थान में अब थर्ड फ्रंट (तीसरे मोर्चे) की बेहद आवश्यकता है। साल 2018 में एक बार ऐसा समीकरण बना था, लेकिन डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और घनश्याम तिवाड़ी अलग-अलग चले गए, जिससे हमारे केवल तीन ही विधायक रह गए। 5. सभी लोग केवल पैसा कमाने के लिए काम कर रहे हैं
सीकर के कोचिंग संस्थानों पर बोलते हुए बेनीवाल ने कहा-आज सभी लोग केवल पैसा कमाने के लिए काम कर रहे हैं। बच्चों की सुविधाओं के बारे में कोई नहीं सोच रहा। बच्चों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं मिलनी चाहिए। हम कोचिंग चलाने वालों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बच्चों के भविष्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।” जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले पर उन्होंने कहा-इस घोटाले में महेश शर्मा और सुबोध अग्रवाल जेल गए, लेकिन क्या केवल वे दो लोग ही इसमें आरोपी हैं? इसमें करीब 150 लोग और शामिल हैं, तो उन्हें क्यों नहीं पकड़ा जा रहा? इस मामले में बानसूर के विधायक के भाई का भी नाम सामने आ रहा है। जब जाति के आधार पर व्यवस्था चलाई जाती है, तो काम खराब होता है और यही हाल आज राजस्थान का हो रहा है।” पहले वसुंधरा और गहलोत के गठबंधन ने राजस्थान को खराब किया और अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को प्रशासनिक समझ नहीं है। दिल्ली वालों को भी राजस्थान की कोई जल्दी नहीं है, वे सोच रहे हैं कि अगले साल ठीक करेंगे। लेकिन तब तक तो राजस्थान पाताल में चला जाएगा। 6. जो लोग मेरा थैला पकड़ते थे, आज बोल रहे हैं कि हनुमान की राजनीति खत्म कर देंगे बेनीवाल ने कहा- यदि किसी का बच्चा नीट परीक्षा में सिलेक्ट नहीं होता, तो माता-पिता उन्हें मोटिवेट करें, क्योंकि डॉक्टर बनना ही जिंदगी का एकमात्र मकसद नहीं है। आज मैं सत्ता छोड़कर जनता के बीच घूम रहा हूं। जो लोग कभी मेरा थैला पकड़ते थे, आज वे राजस्थान में तीन-तीन बार मंत्री बन गए हैं। जिन्हें मैं कभी मिलने का समय नहीं देता था, आज वे बोल रहे हैं कि हनुमान की राजनीति खत्म कर देंगे। छात्रसंघ चुनाव पर उन्होंने कहा- राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव करवाने की मांग को लेकर हमने सभी संभागों में रैलियां कीं। लेकिन जब जयपुर में छात्रों को बुलाया गया, तो वहां केवल 2 हजार छात्र ही आए। मैंने जब आम छात्रों से राय जानी कि क्या छात्रसंघ चुनाव होने चाहिए, तो उन्होंने कहा कि हमें इससे कोई मतलब नहीं है। चुनाव केवल वे ही चाहते हैं जो अध्यक्ष बनना चाहते हैं। ऐसे लोग लड़ाई तो मुझसे लड़वाना चाहते हैं और बाद में एबीवीपी (ABVP) या एनएसयूआई (NSUI) को मजबूत करना चाहते हैं। अब ऐसी दोहरी नीति से चीजें कैसे चलेंगी?