सीकर जिले के पाटन के रहने वाले ग्रेनेडियर देशराज सिंह तंवर 25 अप्रैल को अरुणाचल में शहीद हो गए। काचरेड़ा निवासी देशराज सिंह ड्यूटी के दौरान भूस्खलन (लैंड स्लाइड) की चपेट में आ गए। देशराज 28 अप्रैल को छुट्टी लेकर अपने गांव आने वाले थे। लेकिन, उसी दिन उनका शव पहुंचा तो वीरांगना तमन्ना और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मंगलवार दोपहर 12 बजे शहीद का पैतृक गांव में सैन्य सम्मान से अंतिम संस्कार किया गया। चाचा के बेटे रवि सिंह ने पार्थिव देह को मुखाग्नि दी। देशराज सिंह ने 22 अप्रैल को ही घर पर अपनी पत्नी तमन्ना सिंह से बात की और अपनी 2 साल की बेटी के हालचाल पूछे थे।देशराज सिंह की 2023 में शादी हुई थी। उनकी दो साल की एक बेटी है। शहीद देशराज सिंह के चाचा दशरथ सिंह ने बताया- 25 अप्रैल को देशराज सिंह अपने 12 साथियों के साथ बॉर्डर पर गश्त कर रहे थे। इस दौरान दोपहर 2 बजे देशराज सिंह के 10 साथी आगे निकल गए। जबकि देशराज समेत तीन जवान पीछे आ रहे थे। इस दौरान अचानक तीनों भूस्खलन की चपेट में आ गए। हादसे में देशराज समेत दो जवान शहीद हो गए। जबकि एक जवान घायल हो गया। शहदी की अंतिम यात्रा की तस्वीरें दशरथ सिंह ने बताया- 25 अप्रैल की शाम देशराज के बड़े भाई भोजराज सिंह को आर्मी हेडक्वार्टर फोन के जरिए घटना की सूचना मिली। भोजराज सिंह सेना में सिपाही के पद पर तैनात हैं। उनकी पोस्टिंग जम्मू कश्मीर में हैं। 6 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकली दशरथ सिंह ने बताया- सुबह 8 बजे देशराज सिंह की पार्थिव देह पाटन थाने पहुंची। जहां तिरंगा यात्रा को लेकर तैयारी की गई थी। इसके बाद थाने से 6 किलोमीटर दूर शहीद के पैतृक गांव काचरेड़ा तक तिरंगा यात्रा निकाली गई। शहीद की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय युवा और ग्रामीण शामिल हुए। रास्ते में जगह-जगह फूलों की बारिश कर शहीद देशराज सिंह तंवर अमर रहें के नारे लगे। शहीद की पार्थिव देह काचरेड़ा पहुंचने के बाद वीरांगना तमन्ना देवी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों ने उन्हें संभाला। चचेरे भाई ने दी मुखाग्नि दशरथ सिंह ने बताया-दोपहर 12 बजे घर से एक किलोमीटर दूर स्थित श्मशान घाट में शहीद देशराज सिंह की पार्थिव देह का अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले सेना के जवानों ने शहीद देशराज सिंह के पिता उदय सिंह को तिरंगा सौंपा। साथ शहीद को सलामी दी गई। इसके बाद चाचा के बेटे रवि सिंह ने पार्थिव देह को मुखाग्नि दी।। 2019 में जॉइन की थी सेना देशराज सिंह के चाचा सुबे सिंह ने बताया- देशराज सिंह जुलाई 2019 में सेना में भर्ती हुए थे। 13 जनवरी को घर आए थे और एक महीने की छुट्टी के बाद 14 फरवरी को वापस ड्यूटी पर चले गए थे। 7 मई को देशराज सिंह के ससुराल में कार्यक्रम था। इसके बाद 10 मई को मामा के बेटे की शादी थी। इसके लिए 28 अप्रैल को देशराज सिंह घर आने वाले थे दादा भी सेना में रह चुके हैं चाचा सुबे सिंह ने बताया- देशराज अपने तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थे। उनका बड़ा भाई भोजराज सिंह भी सेना में कार्यरत है और दादा भगवान सिंह भी सेना से रिटायर्ड हैं। … यह खबर भी पढ़ें राजस्थान का अग्निवीर पश्चिम बंगाल में शहीद:3 घंटे पहले मां से फोन पर बात की थी; बोले- ड्यूटी से आया हूं, अब खाना खाऊंगा राजस्थान के अग्निवीर करणसिंह राठौड़ (22) पश्चिम बंगाल में शहीद हो गए। वे सीकर के श्रीमाधोपुर के कंचनपुर-जोरावरनगर गांव के रहने वाले थे। शहीद के रिश्तेदार चतर सिंह राठौड़ ने बताया- करणसिंह राठौड़ दिसंबर 2022 में भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में भर्ती हुए थे। वे 17 कॉर्स सिलीगुड़ी बागडोगरा में तैनात थे। 1 फरवरी की शाम को सिलीगुड़ी से आर्मी के कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) का फोन आया। उन्होंने करणसिंह के निधन की सूचना दी गई। (पढ़ें पूरी खबर)