जोधपुर रेंज में वन विभाग ने भीषण गर्मी के बीच वन्यजीवों को राहत देने के लिए महज 6 लाख रुपए का बजट जारी किया है। इसके तहत जंगलों में जल संकट से निपटने के लिए 38 स्थानों पर टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया जाएगा। विभाग ने गर्मी के प्रभाव को देखते हुए यह कदम उठाया है, ताकि वन्यजीवों को पर्याप्त पानी मिल सके और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। दरअसल, भीषण गर्मी के चलते प्राकृतिक जलस्रोत सूखने लगे हैं, जिससे खुले में विचरण करने वाले वन्यजीवों के सामने पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में वन विभाग को मिला सीमित बजट हालात से निपटने के लिए नाकाफी साबित हो रहा है, जिसे विशेषज्ञ ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ बता रहे हैं। भीषण गर्मी में प्यासे वन्यजीव, 6 लाख का बजट ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ वन्यजीव प्रभाग जोधपुर ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तीन रेंजों में वन्यजीव बहुल क्षेत्रों का सर्वे कराया है। सर्वे के बाद 38 ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां टांकों और तालाबों के जरिए पानी की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए जून तक टैंकरों से पानी पहुंचाने का प्लान बनाया गया है, जिसके लिए सरकार ने कुल 6 लाख रुपए का बजट जारी किया है। हालांकि, प्रादेशिक वन मंडल के अंतर्गत आने वाले बिलाड़ा, भोपालगढ़, ओसियां, बालेसर, शेरगढ़, फलोदी और बाप रेंज के वॉटर पॉइंट्स के लिए महज 2 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। पूरे ग्रीष्मकाल के लिए यह राशि बेहद कम मानी जा रही है, जिससे वन विभाग के सामने चुनौती और बढ़ गई है। गर्मी से पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों में जा रही वन्यजीव गर्मी के कारण जलस्रोतों के सूखने से वन्यजीव पानी की तलाश में अब आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। चिंकारा, ब्लैक बक, रोजड़े, सियार और भेड़िए जैसे वन्यजीव गांवों और शहरों में भटकते नजर आ रहे हैं, जहां उन्हें कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
