चूरू के अभिषेक कुल्हरी ने RAS-2024 रिजल्ट में ब्लाइंड कैटेगरी में दूसरी रैंक हासिल की। एक एक्सीडेंट में उन्होंने अपनी दोनों आंखों की रोशनी खो दी थी। लोग कहते थे- अब तेरा कुछ नहीं हो पाएगा। अभिषेक ने बताया- इन्हीं तानों ने मुझे मोटिवेट किया। मेडिटेशन से पॉजिटिव एनर्जी आई। मैंने तय किया कि अब हाथों की लकीरें खुद बनानी होंगी। मैंने किस्मत पर भरोसा नहीं किया। राजगढ़ के रहने वाले कुल्हरी ने बताया कि यह मेरा RAS के लिए दूसरा प्रयास था। वर्ष 2023 में मैं तीन नंबर से चूक गया था। इस बार मैंने तैयारी जारी रखी और सफलता हासिल की। जनरल कैटेगरी में मेरी रैंक 2210 रही है। कुल्हरी ने बताया कि वो पैरा एथलीट भी रहे हैं। उन्होंने स्टेट लेवल पर मेडल भी जीते हैं। आंख में घुस गए थे ऑटो के कांच अभिषेक ने बताया- वर्ष 2018 में रॉन्ग साइड से आ रहे ऑटो ने मेरी बाइक को टक्कर मार दी थी। पास में बस खड़ी थी, इसलिए बचने का कोई मौका नहीं मिला। एक्सीडेंट के दौरान ऑटो की लाइट के कांच मेरी आंखों में लगे, जिससे आंखों की नसें डैमेज हो गईं। तब से मुझे आंखों से दिखना बंद हो गया। इलाज में देरी, सर्जरी के बाद भी रोशनी नहीं आई अभिषेक ने बताया- एक्सीडेंट के बाद डॉक्टरों ने पहले मेरी आंखों को नहीं देखा और ब्रेन सर्जरी कर दी। डॉक्टरों ने कहा- मेरे ब्रेन में हवा भर रही है और उन्होंने ब्रेन सर्जरी कर दी। उन्होंने मेरी आंखे देखी भी नहीं। जबकि मैं उस समय सब कुछ पहचान पा रहा था। रोशनी का अंदाजा भी लगा पा रहा था, लेकिन आंखों को प्राथमिकता नहीं दी गई। करीब 10 दिन तक मुझे ऑपरेशन के बाद आईसीयू में रखा, लेकिन उन्होंने आंखों की जांच तक नहीं की। अभिषेक ने बताया- बाद में डॉक्टरों ने कहा कि आंखों में ब्लड जमा हो रहा है, उसे हटाने से रोशनी आ सकती है। मुझे जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल में भर्ती किया गया, जहां बताया गया कि अब बहुत देर हो चुकी है। सर्जरी के बाद भी सिर्फ 1 प्रतिशत चांस है। वहां से मुझे दिल्ली एम्स रेफर किया गया। वहां सर्जरी हुई, लेकिन आंखों की रोशनी वापस नहीं आ सकी। इसके बाद से मुझे दिखना पूरी तरह बंद हो गया। एक्सीडेंट के बाद पूरी तरह बदल गई जिंदगी – अभिषेक रोड एक्सीडेंट के बाद मेरी लाइफ पूरी तरह बदल गई। ऐसा लगा, जैसे जीवन में एकदम से भूचाल आ गया हो। शुरुआत में मुझे बहुत परेशानी होती थी। मुझे हाथ पकड़कर चलना पड़ता था और घर के अंदर भी ठीक से नहीं चल पाता था। हर समय डर लगा रहता था कि कहीं गिर न जाऊं या किसी से टकरा न जाऊं। धीरे-धीरे मुझे इसकी आदत होने लगी। मैंने एक मेडिटेशन संस्था जॉइन की और नियमित मेडिटेशन किया। इससे मुझे मानसिक शांति मिली। इसके बाद मैंने चीजों को महसूस करना शुरू किया, जिससे धीरे-धीरे मैं खुद को संभाल पाया। तानों को बनाया ताकत, मेडिटेशन से मिली पॉजिटिव एनर्जी अभिषेक ने बताया- जब मुझे देखना बंद हो गया तो लोगों ने खूब ताने दिए। लोग कहते थे कि तू हीरो से जीरो हो गया। कई लोग कहते थे कि अब तेरा कुछ नहीं हो पाएगा। भगवान ने तेरी लाइफ में ऐसा ही लिखा है, किस्मत के भरोसे बैठ जा। अभिषेक ने बताया-तानों ने मुझे मोटिवेट किया। मुझे यह समझ आ गया था कि इंसान के पास सोचने-समझने की क्षमता है, बस उसे सही तरीके से इस्तेमाल करना होता है। पैरा एथलीट बनने से नेशनल तक का सफर अभिषेक ने बताया- मैं राजगढ़ (चूरू) से आता हूं, वहां स्पोर्ट्स कल्चर है। एक्सीडेंट के बाद मैंने सोचा कि मुझे स्पोर्ट्स में ही जाना चाहिए। मैंने पैरा ओलंपिक खिलाड़ी देवेंद्र झाझरिया के बारे में सुना, उन्होंने दो बार गोल्ड मेडल जीता है। इससे मेरे मन में आया कि मैं भी पैरा एथलीट बन सकता हूं। मैंने घर पर ही जिम का सामान मंगवाया और एक्सरसाइज शुरू की। अभिषेक ने बताया- मैंने सोचा कि मैं थ्रोअर बन सकता हूं, क्योंकि इसमें फील्ड में ज्यादा मूवमेंट नहीं करना पड़ता। मैंने शॉट पुट से शुरुआत की और 6 से 8 महीने तक रोज 10 से 12 घंटे प्रैक्टिस की। गोल्ड मेडल जीता, फिर एक और हादसा वर्ष 2019 में स्टेट पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शॉट पुट में गोल्ड और जैवलिन थ्रो में ब्रॉन्ज मेडल मिला। नेशनल के लिए सिलेक्ट हो गया। अभिषेक ने बताया- वर्ष 2020 में कोरोना में बाहर जाकर प्रैक्टिस करना संभव नहीं था, इसलिए घर से ही एक्सरसाइज जारी रखी। इसी दौरान वेट लिफ्टिंग करते समय मेरे हाथ से रॉड फिसल गई और सीधे मेरे शोल्डर पर गिर गई। इससे मेरे कंधे में फ्रैक्चर हो गया और मसल्स डैमेज हो गईं। डॉक्टर ने कहा- ब्रेन सर्जरी भी हो चुकी है और अब कंधे की वजह से कम से कम 2 से 3 साल आराम करना पड़ेगा। सिविल सर्विस की तैयारी शुरू की अभिषेक ने बताया- 2 से 3 साल तक खाली बैठना मेरे लिए बहुत मुश्किल था। ऐसे में मैंने सोचा कि दिनभर क्या करूंगा, तभी मेरे दिमाग में सिविल सर्विस की तैयारी का विचार आया। अभिषेक ने बताया- सबसे पहले मैंने नगर पालिका ईओ की तैयारी घर से शुरू की, जिसमें एक नंबर से रह गया। इस तैयारी से मेरा राजस्थान का सिलेबस पूरा हो गया था। इसी दौरान RAS-प्री का एग्जाम हुआ और मैंने 2023 में प्री-क्वालीफाई कर लिया। इसके बाद मेंस की तैयारी के लिए जयपुर में कोचिंग जॉइन की। 14-15 घंटे की पढ़ाई, दूसरों से नोट्स सुनकर की तैयारी अभिषेक ने बताया- मेरे लिए सबसे बड़ा चैलेंज था कि मैं पढ़ाई कैसे करूं। मैंने इसके बारे में पहले नहीं सोचा था कि मुझे मेंस लिखना होगा। मैं कोचिंग के स्टूडियो में जाने लगा, जहां बच्चे मुझे नोट्स पढ़कर सुनाते थे और मैं उन्हें याद करता था। अभिषेक ने बताया- मैं ऑनलाइन क्लासेस के वीडियो 2X (तेज स्पीड) मोड पर सुनता था, ताकि समय मैनेज कर सकूं। रोज 14 से 15 घंटे पढ़ाई करता था, जिसमें 6 क्लासेस सुननी होती थीं। स्टूडियो में जो बच्चे नोट्स पढ़ते थे, उनसे मैं 2-3 बार रिपीट करवाता था, ताकि रिवीजन अच्छे से हो सके। 2023 में 3 नंबर से चूका, 2024 में हासिल की सफलता अभिषेक ने बताया- 2023 में मेंस के मेरे 183 नंबर आए थे, जबकि इंटरव्यू कॉल 186 पर था, मैं सिर्फ 3 नंबर से रह गया था। इसके बाद वर्ष 2024 की वैकेंसी आ गई और मैंने अपनी तैयारी जारी रखी। मैंने वही रूटीन रखा, ऑनलाइन क्लासेज और दूसरों से नोट्स सुनना। मकान मालिक भी मुझे सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक नोट्स पढ़कर सुनाते थे। जब भी टेस्ट सीरीज देखनी होती थी तो मैं कोचिंग जाकर स्टूडेंट्स के साथ प्रैक्टिस करता था और अपनी परेशानी वहीं क्लियर करता था। अब लोग ताने नहीं, बधाई दे रहे हैं अभिषेक ने बताया- जब से रिजल्ट आया है, रात 2-2 बजे तक कॉल आ रहे हैं। पहले कभी कॉल नहीं आते थे, लेकिन अब 2-3 दिन में ही इतने कॉल आ गए, जितने पिछले 5-6 साल में नहीं आए थे। उन्होंने कहा- जो लोग पहले कहते थे कि मैं नहीं कर पाऊंगा, अब वही लोग कह रहे हैं कि उन्हें मुझ पर भरोसा था। पहले जो ताने देते थे, अब वही लोग साथ खड़े नजर आ रहे हैं। …. 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