जैसलमेर. सरहदी जिले की ऐतिहासिक विरासत में शामिल प्राचीन जूनी धन्वा एक बार फिर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। हाल के वर्षों में हुए पुरातात्विक शोध, जिला प्रशासन के सर्वेक्षण तथा धार्मिक गतिविधियों ने इस प्राचीन स्थल के संरक्षण और विकास की आवश्यकता को नई गति दी है। पालीवाल सभ्यता के समृद्ध अतीत को अपने भीतर समेटे यह स्थल इतिहास, संस्कृति, स्थापत्य कला और जल संरक्षण की प्राचीन तकनीकों का महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। जैसलमेर शहर से लगभग 17 किलोमीटर दूर डाबला मार्ग पर स्थित तथा मुख्य सड़क से करीब छह किलोमीटर भीतर बसे जूनी धन्वा के खंडहर आज भी एक विकसित और समृद्ध बस्ती के अस्तित्व की गवाही देते हैं।
