अक्षय तृतीया के मौके पर भीलवाड़ा में आज रविवार को ‘बुजुर्ग विवाह परिचय सम्मेलन’ में देशभर से 80 साल तक के करीब 105 बुजुर्ग शामिल हुए। इनमें छोटी बहन जहां अपनी बड़ी बेटी के लिए लाइफ पार्टनर तलाशने आई तो 80 साल की मां अपनी 55 साल की बेटी के साथ सम्मेलन में पहुंची। मां ने कहा कि दामाद के निधन के बाद बेटी अकेली हो गई, इसलिए उसके लिए हमसफर की तलाश करने यहां आई हूं। गुजरात से आई महिला ने कहा कि शादी के 4 साल बाद हादसे में पति को गंवा दिया। आज घटना को 28 साल बीत गए। परिवार की सभी जिम्मेदारियां और बेटे-बेटियों की शादी करने के बाद अकेले हो गए। ऐसे में उन्हें अब जीवनसाथी की तलाश है। पहले देखिए- परिचय सम्मेलन की तस्वीरें अब पढ़िए- अकेलेपन से जुझ रहे बुजुर्गों की भावनाएं पति के जाने के बाद 28 सालों से अकेले जिम्मेदारियां उठा रही, अब एक साथी तो चाहिए
अहमदाबाद(गुजरात) से आई गीता देवी ने बताया- मेरी शादी 1994 में हुई थी। 1998 में एक एक्सीडेंट में मेरे हसबैंड की डेथ हो गई थी। उसके बाद से अकेलापन हावी है। इसे दूर करने के लिए एक साथी की जरूरत होती है, इसलिए यहां नाम लिखवाया। मेरी 2 बेटियां और एक बेटा है। दोनों बेटियों की शादी हुई, बेटा मेरे साथ रहता है। वह बोलता है कि पहले आप शादी कर लो। पति के जाने के बाद करीब 30 साल तक मैंने सभी दायित्व पूरे किए। बेटियों को खुशी के साथ विदा किया। अब अकेलापन को लेकर सोचती हूं। कई बार लगता है कि जिंदगी आगे कैसे जी पाऊंगी। उम्र का जो एक पड़ाव है, उसमें सभी को एक इंसान की जरूरत होती है। हर किसी के जीवन में एक जीवन साथी होनी चाहिए, इसी कमी को पूरा करने के लिए यहां आई हूं। फिलहाल चर्चा कर रहे हैं, कोई पसंद आया तो बात आगे बढ़ाएंगे। मेरे रिटायरमेंट से 10 दिन पहले पत्नी की मौत हो गई, तब से अकेला हूं
चंडीगढ़(पंजाब) में पंजाब नेशनल बैंक से रिटायर्ड मैनेजर डॉ दिलबाग राय भाटिया ने बताया- मैंने सोशल मीडिया पर इस सम्मेलन का ऐड देखा था, फिर फोन पर बात कर रजिस्ट्रेशन करवाया। आज भीलवाड़ा आया हूं। मेरी वाइफ भी सरकारी सर्विस में थी। मेरे रिटायरमेंट से 10 दिन पहले हम घूम के आए, अचानक से 23 अक्टूबर 2014 को उनकी डेथ हो गई। इस दर्दनाक हादसे के 12 साल हो चुके है। मैंने अपनी लाइफ को 5 साल चलाया। मैंने सोचा था कि मुझे किसी लाइफ पार्टनर की जरूरत नहीं, लेकिन अब मैं सोचता हूं कि मैं 70 क्रॉस कर रहा हूं तो कम से कम दुख सुख के लिए बात करने के लिए एक पार्टनर जरूरी है। मेरा एक बेटा है, वह पुणे में लेक्चर है, बहू डॉक्टर है, दिल्ली में प्रैक्टिस करती है। बेटी सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। हम सभी अपनी लाइफ में व्यस्त हैं। पास में रहने वाला कोई होना चाहिए। मुझे लगता है कि मेरा परिवार मेरे हर फैसले में मेरा साथ देगा। यहां सम्मेलन में एक लेडी से बातचीत की है। आगे देखते है, कैसा रहता है सबकुछ। हालांकि मैं आज भी तब के बैंक मैनेजर से ज्यादा काम करता हूं, इसलिए मेरा एनर्जी लेवल मेनटेन रहता है। मैं चाहता हूं कि जो लाइफ बची हुई है, उसमें एक पार्टनर की जरूरत भी पूरी हो जाए, तो लाइफ अच्छी रहेगी। बातचीत हुई, फोन नंबर एक्सचेंज किए
आयोजक अशोक जैन ने बताया कि बुजुर्गों के बीच बातचीत हुई, एक- दूसरे से बॉन्डिंग को लेकर चर्चा हुई। इसके बाद फोन नंबर भी एक्सचेंज हुए है। उम्मीद है कि सम्मेलन के जरिए अगले कुछ दिनों के भीतर ही चार से पांच जोड़े कोर्ट मैरिज करेंगे। हालांकि कई केस में परिजनों की सहमति भी जरूरी होती है। गुजरात भूकंप की त्रासदी के बाद शुरू की मुहिम
अहमदाबाद की ‘अनुबंध फाउंडेशन’ संस्था की ओर से जिले के नागौरी गार्डन स्थित स्वाध्याय भवन में सम्मलेन को आयोजित किया गया। सम्मेलन में 50 साल से अधिक उम्र के अविवाहित, विधवा, विधुर और तलाकशुदा महिलाएं व पुरुष शामिल हुए। संस्था के अध्यक्ष नंदूभाई पटेल ने बताया कि साल 2001 के गुजरात भूकंप की त्रासदी के बाद इस मुहिम की शुरुआत की गई थी। उस भीषण आपदा में कई लोगों ने अपने जीवनसाथी खो दिए थे, जिससे उपजे अकेलेपन ने हमें विचलित कर दिया। हमनें तब महसूस किया कि बुजुर्गों के लिए भी एक ऐसा मंच होना चाहिए, जहां वे अपना साथी चुन सकें। साल 2002 से शुरू हुए इस सफर में अब तक 94 सम्मेलन हो चुके हैं, जिसमें करीब 16 हजार से अधिक बुजुर्गों ने हिस्सा लिया और 224 जोड़े विवाह के बंधन में बंध चुके हैं। उन्होंने बताया कि इसी दिशा में भीलवाड़ा जिले में पहली बार इस सम्मेलन का आयोजन किया गया, यह संस्था का 95वां सम्म्मेलन है। अजमेर संभाग से अब तक 80 से अधिक बुजुर्गों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। इनमें करीब 50 पुरुष और करीब 30 महिलाएं शामिल है। नंदूभाई पटेल ने बताया की समाज अक्सर बुजुर्गों की भौतिक जरूरतों पर तो ध्यान देता है, लेकिन उनकी भावनात्मक जरूरतों और अकेलेपन को नजरअंदाज कर देता है। यह मंच उसी खालीपन को भरने की कोशिश है। असल में, खुश रहने और साथी चुनने का हक किसी भी उम्र में खत्म नहीं होता। इसी सोच के साथ यह पहल की गई है। आपसी सहमति होने पर संस्था कोर्ट या मंदिर में शादी की पूरी जिम्मेदारी भी निभाएगी। ये खबर भी पढ़िए… पति-पत्नी का एक ही अर्थी पर अंतिम संस्कार:रात में दोनों सोए, सुबह उठे नहीं, ग्रामीण बोले- 45 साल में कभी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा कहते हैं जोड़ियां स्वर्ग में बनती हैं, लेकिन भीलवाड़ा के मांडल कस्बे में एक ऐसी जोड़ी ने दुनिया को अलविदा कहा जिसने ‘जनम-जनम के साथ’ के वादे को हकीकत में बदल दिया। 45 वर्षों तक सुख-दुख में एक-दूसरे का हाथ थामे रखने वाले पति-पत्नी ने एक साथ दम तोड़ा। पूरी खबर पढ़िए