राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने वायुसेना में 39 साल सेवा करने वाले रिटायर्ड स्क्वाड्रन लीडर की याचिका पर अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने 12 मई को यह फैसला सुनाते हुए सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) की क्षेत्रीय पीठ जयपुर के मूल और रिव्यू आदेशों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वे अधिकारी को ‘फ्लाइंग ऑफिसर’ के पद पर नियुक्ति के साथ दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) का लाभ दें। साथ ही एरियर सहित सभी बकाया लाभों का भुगतान 6 महीने में करने का निर्देश दिया। जोधपुर के शांति प्रिय नगर निवासी रिटायर्ड स्क्वाड्रन लीडर सी. सिंह (75) ने कोर्ट में अपने केस की पैरवी खुद की। 1988 से 2026 तक चला वेतन विसंगति का 38 साल लंबा संघर्ष याचिकाकर्ता सी. सिंह ने 21 जनवरी 1966 को वायुसेना जॉइन की थी। करीब 22 साल एयरमैन के रूप में सेवा देने के बाद 17 दिसंबर 1988 को उन्हें ‘फ्लाइंग ऑफिसर’ के पद पर कमीशन किया गया था। यहीं से वेतन विसंगति का मामला शुरू हुआ। याचिकाकर्ता सी. सिंह ने पहले इंटरनल विभाग में शिकायत की। फिर हाईकोर्ट गए। एक बार हाईकोर्ट ने वापस एयरफोर्स ट्रिब्यूनल को भेज दिया। फिर कई साल तक वहां अटका रहा। याचिकाकर्ता सी. सिंह ने लगातार फॉलो किया, तो एएफटी की जयपुर पीठ ने खारिज कर दिया और रिव्यू के लिए कहा। बाद में उसे भी खारिज कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता सी. सिंह वर्ष 2022 में हाईकोर्ट डिवीजन बेंच में गए। अब करीब 38 साल बाद हाईकोर्ट का फैसले में राहत मिली। सी. सिंह 31 अगस्त 2004 को रिटायर हुए थे। विवाद की मुख्य वजह वायुसेना का नियम (AFI 48/75) था। इस नियम के अनुसार 8 साल से अधिक सेवा दे चुके एयरमैन को अफसर पद पर प्रमोट करने पर “फॉर द पर्पज ऑफ पे ओनली” यानी केवल वेतन निर्धारण के उद्देश्य से दो साल की पूर्व-तारीख (ante-date) की वरिष्ठता दी जानी चाहिए थी। चौथे वेतन आयोग में फ्लाइंग ऑफिसर का मूल वेतन 2500 रुपए था। नियम के मुताबिक याचिकाकर्ता का वेतन 2700 रुपए तय होना चाहिए था, लेकिन उन्हें 2500 रुपए ही दिए गए। एएफटी की जयपुर पीठ से राहत नहीं मिलने पर उन्होंने जोधपुर हाईकोर्ट की शरण ली। दो इंक्रीमेंट को लेकर सरकार और याचिकाकर्ता के तर्क याचिकाकर्ता सी. सिंह ने खुद बहस करते हुए कोर्ट को बताया- नियमों के स्पष्ट प्रावधानों के बावजूद उन्हें कमीशन देते समय दो ग्रेड इंक्रीमेंट का लाभ नहीं दिया गया। उन्होंने बताया- उनके साथ पदोन्नत हुए अन्य अधिकारियों के वेतन निर्धारण में भी यही विसंगति रही है। दूसरी ओर केंद्र सरकार के वकील ने तर्क दिया कि नियमों के अनुसार फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर नियुक्ति में ही दो ग्रेड इंक्रीमेंट शामिल होते हैं। यदि दो इंक्रीमेंट अलग से दिए गए तो यह चार इंक्रीमेंट के बराबर हो जाएगा, जो कि विधायिका की मंशा बिल्कुल नहीं थी। डिक्शनरी के अर्थ और ‘ट्रू लेटर एंड स्पिरिट’ के सिद्धांत से मिला न्याय खंडपीठ ने वायुसेना के संबंधित नियम का कानूनी विश्लेषण किया। कोर्ट ने ‘ऑक्सफोर्ड लर्नर्स डिक्शनरी’ का हवाला देते हुए कहा कि नियम में इस्तेमाल किए गए अंग्रेजी शब्द ‘एंड’ (and) का अर्थ ‘इसके अलावा’ या ‘जोड़ना’ (Plus/In addition to) होता है। कोर्ट ने कहा- नियम की भाषा बिल्कुल स्पष्ट है कि अधिकारी को फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर नियुक्ति ‘और’ (and) दो साल की पूर्व-तारीख की वरिष्ठता दी जाएगी। इसका सीधा अर्थ है कि पद पर नियुक्ति के अलावा दो अतिरिक्त इंक्रीमेंट दिए जाने की मंशा स्पष्ट है। कोर्ट ने महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत दोहराते हुए कहा- जब किसी नियम की भाषा स्पष्ट हो, तो अदालत को उसे उसकी ‘ट्रू लेटर एंड स्पिरिट’ यानी शाब्दिक अर्थों में ही लागू करना होता है। केवल अस्पष्टता होने पर ही अदालतें अन्य व्याख्या करती हैं। इन टिप्पणियों के साथ कोर्ट ने एएफटी जयपुर के 22 मार्च 2022 के मूल आदेश और 31 मई 2022 के रिव्यू आदेश दोनों को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को 2700 रुपए के वेतनमान के आधार पर दोबारा गणना कर बकाया भुगतान का आदेश दिया। 2500+100+100=2700 रुपये के फॉर्मूले से एरियर सहित सभी बकाया लाभों का भुगतान 6 महीने में करने का निर्देश दिया।
