ब्यावर जिले के लगेतखेड़ा गांव के अग्निवीर युवराज सिंह चौहान (26) बुधवार को जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए। उनकी पार्थिव देह शुक्रवार दोपहर तक गांव लाई जाएगी। युवराज की सर्विस में कुछ ही महीने बचे थे। इसके बाद वह गांव आकर RAS की तैयारी करने वाले थे। भास्कर टीम युवराज के गांव पहुंची। बड़ी संख्या में लोग परिवार को सांत्वना देने के लिए घर पहुंच रहे थे। युवराज की दादी, मां और पिता का बुरा हाल था। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… युवराज के पिता प्रतापसिंह ने बताया कि 6 मई को मेरे पास 12.30 बजे कॉल आया था। आर्मी अधिकारी बोले- युवराजसिंह के पिताजी बोल रहे हो क्या? मैंने हां में जवाब दिया और पूछा-आप कहां से बोल रहे हैं। ‘मैं अखनूर से बोल रहा हूं। आपकी युवराज से कब बात हुई थी?’ उन्होंने पूछा। मैंने जवाब दिया- ‘रात को ही हुई थी।’ ‘क्या बात हुई थी युवराज से आपकी?’ ‘युवराज ने कहा कि वह कुछ माह में लौटेगा और फिर आरएएस की तैयारी करके अधिकारी बनेगा। तीन साल बाद शादी करेगा।’ ‘आपके आस-पास कौन है?’ ‘युवराज की मां बैठी हैं।’ इस पर आर्मी अधिकारी ने साइड में जाकर बात करने के लिए कहा। ये सुनकर प्रतापसिंह सिहर गए। बोले-क्या बात है? इसके बाद वे आर्मी अधिकारी के कहने पर दूर जाने लगे। युवराज की मां भी उनके साथ चलने लगीं। आर्मी अधिकारी बोले- युवराज बहुत ब्रिलियंट लड़का था। पिता बोले- ‘ब्रिलियंट था’ का क्या मतलब है? बोलिए- ब्रिलियंट लड़का है। अधिकारी बोले- उसके गोली लग गई है। गोली का नाम सुनते ही प्रताप सिंह के पैरों तले जमीन खिसक गई। हमेशा ड्यूटी पर छोड़ने जाते थे पिता युवराज के पिता बोले- मेरा बेटा बहुत दिलेर था। बचपन से जुनून था कि दादाजी की तरह आर्मी में जाऊंगा। इतना जुनून था कि साढ़े 17 साल की उम्र में पहली बार में भर्ती हो गया था। उस दौरान परीक्षा निरस्त होने के कारण वह दूसरी बार में लग गया। मेरे बेटे ने मेरा गर्व गांव में और बढ़ा दिया, लेकिन दुख भी है कि वह आज हम सबके बीच में नहीं है। एक पिता के लिए इससे बड़ा दुख क्या हो सकता है कि उसका जवान बेटा उसके कंधे पर जा रहा है। इस बार ही मैं उसे मार्च में ड्यूटी के लिए छोड़ने नहीं गया था। उसके जाने के दौरान मन खराब हो रहा था। अंदेशा हो रहा था कि कुछ गलत होने वाला है। 6 मई को जब आर्मी के अधिकारी का कॉल आया तो ऐसा लगा जैसे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। किसी ने गोली मार दी हो। मेरा परिवार खत्म कर दिया आतंकियों ने। नहीं रुक रहे मां के आंसू मां संतोषी देवी ने जब बेटे युवराज के बारे में पति प्रताप सिंह से सुना तो अचेत हो गईं। प्रताप सिंह ने आवाज देकर परिवार के लोगों को बुलाया। उन्हें पानी पिलाया। बुधवार दोपहर से ही संतोषी देवी ने कुछ नहीं खाया है। बार-बार निढाल होकर गिर जाती है। रोती रहती हैं कि उनका बेटा युवराज जैसे गया था वैसे ही आना चाहिए। कुछ महीने ही तो रह गए थे, जब उसकी नौकरी पूरी होने वाली थी। इस तरह की कुछ बातें बोल कर बार-बार निढाल हो रही थी। गांव की महिलाएं संभालने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन उनके आंसू नहीं रुक रहे थे। दादी का भी बुरा हाल दादी सीतादेवी का रो-रोकर बुरा हाल है। युवराज सबसे छोटा पोता था। रोते-रोते बोलीं- तेरे दादा ने भी गोली खाई थी। वह भी घर आ गए थे। उनकी तरह ही घर लौट आता। तू कहां चला गया युवराज। तेरे बिना मेरा घर सूना हो गया है। युवराज बचपन से ही दादी-दादा के पास सबसे अधिक रहता था। दादा को आर्मी की वर्दी में देखकर बोलता था कि मैं भी इनकी तरह बनूंगा। परिवार के हर व्यक्ति से करते थे बात युवराज के दादा भी आर्मी में थे। उन्हें 1999 में गोली लग गई थी। कुछ समय उनका उपचार चला और फिर उन्हें रिटायर कर दिया गया। युवराज के बड़े भाई हरीश सिंह ने बताया कि हम दोनों भाई आर्मी में जाना चाहते थे, लेकिन मैं सफल नहीं हुआ। इसके बाद मैंने माइनिंग शुरू कर दी। मंगलवार रात को युवराज से बात हुई थी। बोल रहा था- भाई! अब केवल 6-7 महीने रह गए हैं। उसके बाद गांव में आकर आरएएस की तैयारी करूंगा। हरीश बोले- मुझे विश्वास था कि अगर वह आरएएस की तैयारी करता तो टॉप पर आता। फिर आप लोग उसका इंटरव्यू लेने के लिए आते। विधि का विधान देखिए कि ऐसी घटना हुई और आप घर पर आए हैं। मेरा भाई भले ही घर से दूर रहता था, लेकिन घर के हर सदस्य से बात करता। उनकी जरूरत पूछता था। ये खबर भी पढ़ें… ब्यावर का अग्निवीर जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद:कल होगा अंतिम संस्कार; डेढ़ महीने पहले ही ड्यूटी पर लौटे थे ब्यावर जिले के लगेतखेड़ा गांव निवासी अग्निवीर युवराज सिंह चौहान (26) बुधवार को जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए। उनकी पार्थिव देह शुक्रवार को गांव लेकर आएंगे। वहां उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। (यहां पढ़ें पूरी खबर)