आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था में मौजूद जटिलताओं और विसंगतियों को लेकर गुरुवार को शहर में बड़ा ‘महामंथन’ आयोजित किया गया। जन जागृति मंच के तत्वावधान में हुई गोष्ठी में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों, उद्योगपतियों, अधिवक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने केंद्र सरकार से ईडब्ल्यूएस की पात्रता शर्तों को सरल, व्यवहारिक और वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाने की मांग उठाई। मौजूदा नियम गरीबों के लिए बन रहे बाधा गोष्ठी में मुख्य वक्ता और जन जागृति मंच के प्रणेता धर्मेंद्र राठौड़ ने कहा कि सरकार का मूल उद्देश्य सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को राहत देना था, लेकिन वर्तमान नियम इस उद्देश्य को पूरा करने के बजाय लोगों के लिए परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 8 लाख रुपये की आय सीमा और 5 एकड़ कृषि भूमि जैसी शर्तें व्यवहारिक नहीं हैं। कई परिवारों के पास केवल नाममात्र या बंजर जमीन होने के बावजूद उन्हें कागजों में संपन्न मान लिया जाता है, जिससे वास्तव में जरूरतमंद लोग आरक्षण के लाभ से वंचित रह जाते हैं। सभी वर्गों ने एकजुट होकर उठाई आवाज गोष्ठी में मौजूद वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि वर्तमान ईडब्ल्यूएस नियमों की जटिलताओं को दूर करना बेहद जरूरी है। उद्योगपति इन्दर सिंह बागावास, आशीषपाल पदावत, शेख सय्यद मुग़ल पठान महासभा के अध्यक्ष बशीर मोहम्मद, परशुराम जन्मोत्सव संयोजक मनोज शर्मा, राजपूत महासभा के पूर्व अध्यक्ष बजरंग सिंह शेखावत, सामाजिक नेत्री कल्पना भटनागर और अधिवक्ता सुलक्षणा शर्मा सहित कई गणमान्य नागरिकों ने अपने विचार रखे। बशीर मोहम्मद और बजरंग सिंह शेखावत ने इसे “गरीब की लड़ाई” बताते हुए सभी वर्गों से एकजुट होकर आवाज उठाने का आह्वान किया। प्रमाण पत्र प्रक्रिया आसान बनाने पर जोर अधिवक्ता सुलक्षणा शर्मा ने ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में आने वाली कानूनी जटिलताओं को कम करने की जरूरत बताई। वक्ताओं ने कहा कि कई पात्र लोग केवल प्रक्रिया की कठिनाइयों के कारण लाभ नहीं ले पाते। गोष्ठी में मांग की गई कि ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र प्रक्रिया को ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ से जोड़ा जाए, ताकि युवाओं को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें। महत्वपूर्ण मांगें रखीं गईं गोष्ठी में वक्ताओं ने सर्वसम्मति से कई प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखीं। इनमें महंगाई के अनुरूप आय सीमा का पुनर्निर्धारण, ग्रामीण और शहरी संपत्ति मानकों का सरलीकरण, प्रमाण पत्र प्रक्रिया को आसान बनाना और पात्र युवाओं को शिक्षा एवं रोजगार में बिना बाधा अवसर उपलब्ध कराना शामिल रहा।
युवाओं को दी आवेदन प्रक्रिया की जानकारी कार्यक्रम के दूसरे चरण में युवाओं के लिए विशेष मार्गदर्शन सत्र आयोजित किया गया। इसमें उन्हें ईडब्ल्यूएस आवेदन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। बताया गया कि आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और भूमि दस्तावेजों के माध्यम से जन सुविधा केंद्रों पर आवेदन किया जा सकता है। इसके साथ ही जरूरतमंद युवाओं की सहायता के लिए हेल्पलाइन शुरू करने पर भी विचार किया गया। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा ज्ञापन बैठक के अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि ईडब्ल्यूएस नियमों में सुधार की मांग को लेकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। उद्योगपतियों और सामाजिक संगठनों ने इस अभियान में हरसंभव सहयोग देने का भरोसा भी दिलाया। ‘समान अधिकार-समान न्याय’ के नारों के साथ समापन कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट अजय शर्मा ने किया। अंत में “समान अधिकार-समान न्याय” के नारों के साथ गोष्ठी का समापन हुआ। होटल परिसर देर तक लोगों के उत्साह और चर्चा से गूंजता रहा।