बाड़मेर रिफाइनरी पर देरी को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ सोशल मीडिया पर भिड़ गए। रिफाइनरी पर बात सियासी संकट, कांग्रेस की गुटबाजी और वसुंधरा राजे तक पहुंच गई। राठौड़ ने कांग्रेस की गुटबाजी पर तंज कसा तो जूली ने राठौड़ के वसुंधरा राजे से दूरी बनाने का कारण पूछ लिया। विवाद की शुरुआत पूर्व सीएम अशोक गहलोत के 4 दिसंबर को रिफाइनरी पर किए गए ट्वीट से हुई। गहलोत ने रिफाइनरी शुरू होने में देरी और लागत बढ़ने पर सवाल उठाए तो राठौड़ ने पलटवार करते हुए देरी के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। इस पर टीकाराम जूली ने पलटवार किया। फिर दोनों के बीच वार-पलटवार का सिलसिला शुरू हो गया। आप पर ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ वाली कहावत बिल्कुल सटीक
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राजेंद्र राठौड़ को जवाब देते हुए एक्स पर लिखा- रिफाइनरी पर बोलने से पहले आपको अपने गिरेबान में झांकना चाहिए था। आप पर ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ वाली कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है। आप किस ‘गति’ की बात कर रहे थे? सच यह है कि 2013 में कांग्रेस सरकार की स्वीकृत रिफाइनरी को 2014 से 2018 तक आपकी सरकार ने अटकाए रखा। 4 साल तक ‘रिव्यू’ के नाम पर आपने राजस्थान के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया। अभी तो आप सरकार को बिना मांगी सलाह देने वाले सलाहकार हैं, पर उस समय तो आप ही मुख्य सलाहकार हुआ करते थे। बीजेपी सरकार के कारण रिफाइनरी की लागत 40 हजार करोड़ रुपए बढ़ गई। आंकड़ों की बाजीगरी मत कीजिए, राजेंद्र राठौड़ जी
जूली ने आगे लिखा- आंकड़ों की बाजीगरी मत कीजिए, राजेंद्र राठौड़ जी। सच यह है कि आपकी ‘डबल इंजन’ सरकार ने राजस्थान के खजाने में ‘डबल छेद’ किए हैं। आपने 4 साल काम रोककर प्रोजेक्ट की लागत 37 हजार करोड़ से बढ़ाकर 79 हजार करोड़ कर दी और राज्य सरकार को जबरन 26% का पार्टनर बना दिया, जो सामान्यतः कहीं नहीं होता है। इस कारण बढ़ी हुई लागत का 10,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ सीधे राजस्थान की जनता की जेब पर पड़ा है। यह आपकी देन है। आज आप जिस 90% काम का श्रेय ले रहे हैं, वह वास्तव में 2018 से 2023 के बीच कांग्रेस सरकार की रात-दिन की मेहनत का नतीजा है, जिसे हमने कोरोना जैसी महामारी के बावजूद रुकने नहीं दिया। हिचकोले खाते-खाते जैसे तैसे 5 साल पूरे किए थे
राजेंद्र राठौड़ ने फिर पलटवार करते हुए लिखा- यदि आपकी सरकार के लिए 2018 से 2023 तक रिफाइनरी की प्राथमिकता रही थी तो 5 साल में इस प्रोजेक्ट का काम कितना बढ़ा था? आपकी सरकार ने रिफाइनरी को लेकर जितना शोर किया, काम उसका आधा भी नहीं हुआ था। यह काम होना भी नहीं था क्योंकि तत्कालीन कांग्रेस सरकार रूपी जहाज में इतने छेद हो गए थे कि हिचकोले खाते-खाते जैसे तैसे 5 साल पूरे किए थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री सहित समस्त मंत्रिमंडल का पूरा ध्यान सरकार बचाने में था ना कि बाड़मेर रिफाइनरी जैसी महत्वपूर्ण परियोजना को पूरी करने में। कांग्रेस सरकार ने भी 6 सलाहकार बनाए थे
राठौड़ ने लिखा- शायद आप भूल गये हैं कि आपकी ही सरकार ने 6 विधायकों को सलाहकार की उपाधि दी थी। अगर उनकी कीमती सलाह सच में आपके नेताओं को समझ आती, तो शायद आज कांग्रेस के “अच्छे दिन” कहीं तो दिखाई दे जाते। मुझे आपके प्रति सहानुभूति है कि आप उस वक्त सलाहकार की भूमिका में नहीं थे वरना 25 सितंबर 2022 का वह कुख्यात घटनाक्रम जिसने आपकी पार्टी की अंतर्कलह को देशभर में तमाशा बना दिया था शायद घटित ही नहीं होता। भाजपा में सलाकार पद नहीं संस्कार है
राठौड़ ने लिखा- खैर जूली जी, आपका ध्यान मुझे सलाहकार की उपाधि देने में लगा है लेकिन सच्चाई यह है कि भाजपा में सलाह देना कोई पद नहीं बल्कि एक संस्कार है। मैं तो हूं ही, मेरे जैसे हजारों समर्पित कार्यकर्ता रोज अपनी सरकार को सुझाव देते हैं और फर्क यह है कि भाजपा सरकार उन सुझावों को सुनती भी है और लागू भी करती है। राठौड़ साहब, आप पहले वसुंधरा राजे के सबसे बड़े सलाहकार थे, अचानक दूर क्यों हुए?
टीकाराम जूली ने राठौड़ पर पलटवार करते हुए लिखा- राठौड़ साहब, मेरी सहानुभूति की चिंता आप न करें, सहानुभूति की जरूरत आज आपको ज्यादा है। कई राज्यों में सरकारी प्रवक्ता का पद है, मुख्यमंत्री को यहां आपके लिए ऐसा पद देना चाहिए।
राठौड़ जी, आप “सलाहकार” होकर भी अपनी सरकार को सही सलाह क्यों नहीं देते? भाजपा सरकार ने वर्ष 2025-26 की बजट घोषणा संख्या 158 में लिखित में घोषणा की थी कि पचपदरा रिफाइनरी अगस्त, 2025 से उत्पादन शुरू कर देगी। आज आप कह रहे हैं जनवरी 2026? जूली ने लिखा- क्या आपकी सरकार बिना किसी एस्टिमेट के बजट बना रही है?विधानसभा के पटल पर रखी गई बजट घोषणा झूठी कैसे साबित हो गई? यह साफ है कि आपकी सरकार सिर्फ “हवा-हवाई” घोषणाएं करने में व्यस्त है, धरातल पर आपकी पकड़ शून्य है। आप हमारे जहाज की चिंता छोडिए, अपनी नाव देखिए
जूली ने लिखा- पूरा राजस्थान जानता है कि एक समय आप पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सबसे बड़े ‘सलाहकार’ हुआ करते थे। फिर अचानक ऐसी क्या बात हो गई कि आप उनसे इतना दूर हो गए? वो कौन सा राज है जिसने आप जैसे ‘चाणक्य’ को हाशिए पर ला खड़ा किया? आप हमारे जहाज की चिंता छोडि़ए, अपनी ‘नाव’ देखिए। आज राजस्थान भाजपा में ‘CM इन वेटिंग’ (मुख्यमंत्री के दावेदारों) की लिस्ट आपके विधायकों की संख्या से भी ज्यादा लंबी है। हालत यह है कि जयपुर तो छोडि़ए, दिल्ली वाले भी राजस्थान आकर सीएम बनने का सपना देख रहे हैं। जिस पार्टी में हर दूसरा नेता खुद को मुख्यमंत्री मान बैठा हो, हर विधायक ,मंत्री कहता हो कि मेरी कुछ नहीं चल रही, वहां अनुशासन की दुहाई देना हास्यास्पद है।