बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी एसडीएम केशव कुमार मीना और भाजपा प्रधान बिजलाराम चौहान के बीच शुक्रवार को बहस हो गई। प्रधान ने कहा- मेरी पंचायत समिति में कोई सुनता नहीं है। वहां पर चमचे और एजेंट बैठा रखे हैं। एसडीएम ने कहा- आप इस्तीफा क्यूं नहीं देते हो। जो मेरी क्षमता में होगा, वही काम करूंगा। आप कह दोगे कि चांद लाकर दे दो, मैं कहां से लाकर दूंगा। जवाब में प्रधान ने कहा- कितने ज्ञापन दिए, आप मीठी गोली दे देते हो। दरअसल, किसान संघर्ष समिति गुड़ामालानी के बैनर तले प्रधान बिजलाराम और किसान शुक्रवार को फसल बीमा क्लेम, बिजली समस्या समेत अपनी 11 मांगों को लेकर ज्ञापन देने पहुंचे और धरने बैठ गए। इस दौरान प्रधान और एसडीएम के बीच तकरार हो गई। पढ़िए, एसडीएम और भाजपा प्रधान के बीच पूरी बहस… प्रधान- मैंने आपको लेटर दिया, उसका उत्तर दिया क्या? फालतू गोली देते हो यार। एसडीएम- क्या गोली देते हैं। प्रधान- मैंने लेटर लिखे, उसका एक भी उत्तर दिया आपने? एसडीएम- उत्तर आएगा तभी तो दूंगा। प्रधान- कब दोगे लेटर का जवाब। लेटर का उत्तर नहीं देते हो और फालतू बोल रहे हैं। एसडीएम- सुअर का काम (खेतों में सुअरों का आतंक रोकने) तो आपका है। प्रधान- सुअर का काम नहीं मानते है, आप लेटर लिखो। एसडीएम- प्रधान कह रहे हैं कि मेरी मानते नहीं है। गजब आदमी है। प्रधान- नहीं मानते हैं, तभी तो कह रहा हूं। एसडीएम- क्यूं हो प्रधान, इस्तीफा दे दो आप। प्रधान- इस्तीफा ही है। एसडीएम- प्रधान कह रहा है कि मेरी पंचायत समिति में चलती नहीं है। प्रधान- नहीं चलती है, तभी तो आपके पास आ रहे हैं। एसडीएम- पावर प्रधान के पास है, काम करना है। प्रधान- भाईसाहब, मैं कह रहा हूं कि वहां पर चमचे और एजेंट बैठा रखे हैं। लेटर लिखिए। एसडीएम- हमने भी खूब लेटर लिखे हैं। प्रधान- मैं आपको लेटर देता हूं, आप आगे लिख देते हो। एसडीएम- जो आप करते आए हो, वो करना है, जो काम करने मैं सक्षम हूं, वही हम करेंगे। प्रधान- क्या करना है, आप दो घंटे से कहे रहे हो, आपके पास इसके उत्तर हो तो दे दो। एसडीएम- मैंने यह कहा कि जो मेरे क्षमता है, मैं यहां पर करता हूं। जो नहीं है, उसके लिए लेटर लिख देंगे। आप कह रहे हो मीठी गोली दे रहे हो, इसमें मीठी गोली क्या है? प्रधान- दीपावली से पहले धरना स्थल पर 15 दिन में आदान-अनुदान दिलाने के लिए कहा था। एसडीएम- मेरे हाथ में है क्या? पैसे डालना मेरे हाथ में है क्या। प्रधान- आप यहां से लिख तो सकते हो। एसडीएम- मैंने 50 लेटर लिख रखे हैं। मीठी गोली देते हो। मेरे ओटीपी से रुपए ट्रांसफर हो जाएंगे। प्रधान- आप कब से मीठी गोली दे रहे हो। लॉलीपॉप देना। अब तो आप जाओगे। एसडीएम- जाएंगे, कब से मीठी गोली… मीठी गोली लगे हुए हो। मीठी गोली आप देते हो। प्रधान- आप ऐसा काम करो कि किसान आपको याद करें, अच्छा अधिकारी आया था और अच्छा काम करके गया था। एसडीएम- हमारा काम चुनाव लड़ना नहीं है, हमें हमारा नाम नहीं करवाना है। हम हमारा काम कर रहे हैं। मैं काम करके किसी पर एहसान नहीं कर रहा हूं। हमारी ड्यूटी है। बात करने का तरीका होता है। अरे भाई जो मेरी क्षमता में होगा वही काम करूंगा। आप कह दो कि चांद लाकर दे दो, मैं कहां से लाकर दूंगा। आप करते हो ऐसी। एसडीएम किसान संघ के पदाधिकारियों से कहा- मेरी बात सुनो। आप मेरी बात सुनो, ईमानदारी से बताओ। हालांकि किसान पदाधिकारी भी उनसे उलझ पड़े। प्रधान- हम ईमानदारी से कह रहे हैं। किसान संघ पदाधिकारी- ईमानदारी से कह रहा हूं कि यह आपके अधिकार क्षेत्र में नहीं था। 2 महीने पहले 2 हजार किसानों की उपस्थिति में कहा था यह पर्यटन विभाग की जमीन है और वहां पर पट्टे है। आपकी दो बातें आ गई साहब। एसडीएम- मेरी बात सुनो, अगर नियम के विरूद्ध है तो उसको मैं तोड़ूंगा। आप दो बात मत करो। एक बात करो। अगर आप वास्तव में इंसान हो तो एक बात करो। इस दौरान प्रधान बीच में बोले तो कहा- आप बीच में मत बोलों- मैं इनसे बात कर रहा हूं। एक आदमी से बात कर रहा हूं। बीच में बोलने का शौक है। किसान पदाधिकारी- एक पैमाइश करनी थी, 2 साल से भटक रहे हैं। आप से पैमाइश नहीं होती है क्या? सरकारी जमीन थी। जमीन आवंटन करते हैं उसकी रक्षा करता है। आपने कैसी रक्षा की। पर्यटन विभाग, केवीके की जमीन की रक्षा नहीं हो पाई, किसान रोज आते हैं ज्ञापन देकर चले जाते हैं। यहां की पूरी सरकार आप है। आपकी कौनसी क्षमता नहीं है। 2 साल पहले काम हो रहा था, वह बंद हो गया। होता हुआ काम बंद हो गया आपकी क्षमता से बाहर कैसे हो गया। एसडीएम- कौनसे काम बंद हो गए। किसान पदाधिकारी- पानी जा रहा था वो बंद, नर्मदा का पानी आ रहा था, वो बंद हो गया। एसडीएम- पूरे फील्ड में जो समस्या हो रही है वो मेरी वजह से हो रही है क्या? किसान पदाधिकारी- आप मॉनिटरिंग करते। एसडीएम- हम अच्छी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। किसान पदाधिकारी- तो हम लोग क्यूं आते, वहां खड़े किसानों से पूछा कि आप शौक से आए हो क्या। एसडीएम- कोई सुनने को राजी नहीं है। प्रहलाद जी बोल रहे हैं। बीच में बोले प्रधान को डांटते हुए कहा कि बीच में क्यूं बोल रहे हो। प्रधान- कौनसा बीच में बोल रहा है। एसडीएम- आराम से करो नेतागिरी। प्रधान- नेतागिरी आज दिन तक नहीं की है। ईमानदारी से कह रहा हूं। कभी राजनीति नहीं की है। एसडीएम- करो ना, प्रधान जी जब सबको कह रहा हूं तो आप चुप क्यूं नहीं रहते हो। बाद में बोल दो प्रधान- हम बीच में नहीं बोल रहे हैं। हम तो कह रहे हैं कि एसडीएम के अधिकार है, उस कर्तव्य को पूरा करो। किसान- बात तो सिर्फ मुख्य किसान आदान-अनुदान की है। दीपावली से पहले धरना दिया था, तब कहा था आपके दीपावली तक करवा देंगे। राशि आ जाएगी। किसान यहां पर 3 दिन तक बैठे रहे। आगे-आगे समय देने पर किसानों को लगता है कि गुमराह क्यूं हो रहे हैं। एसडीएम साहब आप हमारे दुश्मन नहीं हो। आपके लेवल की है तो ठीक, नहीं तो यह कह दो कि मेरे लेवल की नहीं है। एसडीएम ने किसान ताजाराम से पूछा कि आप ही बताओ आदान-अनुदान का पैसा किसके लेवल का काम है। किसान- आपसे नहीं हो रहा है तो आप हाथ जोड़ लो, एसडीएम- आप गोली मत दो, सीधे बोलो। एसडीएम की ओटीपी से पैसा जाएगा क्या, किसकी ओटीपी से जाएंगे? किसान- इसके लिए जिम्मेदार कौन है। ओटीपी तो कलेक्टर की भी नहीं लगती है। एसडीएम- मैं जिम्मेदार हूं क्या, इसके जिम्मेदार कौन है। किसान- सरकार जिम्मेदार है आप सरकार के यहां पर सबसे बड़े अधिकारी है। बात इतनी सी है। इससे ज्यादा कुछ नहीं है। एसडीएम- सीधी बात बताओ कि क्या एसडीएम की लापरवाही से आपका पैसा नहीं आ रहा है। बताओ किसान पदाधिकारी- आपने अपने मुंह से बोला था। एसडीएम- सीधा बोलो, घुमाओ नहीं। किसान पदाधिकारी- आपने मुंह से बोला था, आपने कहा था कि 15 दिन में आ जाएगा, लेकिन 2 महीने से नहीं आया। फिर जिम्मेदार कौन है। अगर 15 दिन में नहीं आएगा तो आपने लॉलीपॉप क्यूं दिया। एसडीएम- मैंने जो ऊपर बात की वो मैंने आपको बता दी, 15 दिन तक मेरे पास पेडिंग रहा है तो आप मुझे आराम से जो कहना है वो कहो। कोई दिक्कत नहीं है। किसान- आपकी कोई दुश्मनी नहीं है क्यूं आपको कुछ कहें। आश्वासन के बाद लौटे किसान
इस दौरान किसानों ने कहा कि यह अंतिम ज्ञापन है। किसानों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यह उनका अंतिम ज्ञापन है। यदि 3 दिनों में समस्याओं का ठोस समाधान नहीं किया गया तो किसान बड़ा प्रदर्शन करेंगे। समिति पदाधिकारियों ने कहा- किसी भी जन आंदोलन की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। किसानों ने कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, समाधान करना पड़ेगा। इस बीच एसडीएम ने उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद किसान लौट गए। इनपुट : रमेश गौड़
