उदयपुर| संसद में सांसद डॉ. मन्नालाल रावत द्वारा पूछे गए अतारांकित प्रश्न के जवाब में केंद्रीय इस्पात मंत्री भूपतिराजु श्रीनिवास वर्मा ने बताया कि देश में क्रूड स्टील उत्पादन पिछले दस वर्षों में करीब 70 प्रतिशत बढ़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार मूल्यवर्धित इस्पात के उत्पादन को बढ़ावा देने, पूंजीगत निवेश आकर्षित करने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए विशेष इस्पात हेतु उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना लागू कर रही है। मंत्री ने बताया कि देश में क्रूड स्टील उत्पादन वर्ष 2004-05 के 43.44 एमटी से बढ़कर 2014-15 में 88.98 एमटी और 2024-25 में 152.18 एमटी तक पहुँच गया। वहीं तैयार इस्पात का आयात वर्ष 2004-05 में 2.29 एमटी, 2014-15 में 9.32 एमटी तथा 2024-25 में 9.55 एमटी रहा। उन्होंने कहा कि इस्पात क्षेत्र नियंत्रणमुक्त है और सरकार अनुकूल नीतिगत वातावरण तैयार कर ‘सुविधाप्रदाता’ की भूमिका निभाती है, जबकि निवेश, क्षमता विस्तार, आयात-निर्यात जैसे निर्णय कंपनियाँ अपने प्रौद्योगिकीय व वाणिज्यिक विश्लेषण के आधार पर लेती हैं। इस्पात मंत्री ने बताया कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) हॉट रोल्ड कॉइल, प्लेट-शीट्स, कोल्ड रोल्ड कॉइल-शीट्स, गैल्वनाइज्ड स्टील, टीएमटी, स्ट्रक्चरल, पाइप, व्हील-एक्सल और रेल्स का उत्पादन करती है। सेल रेल्स, प्लेट्स और स्ट्रक्चरल के क्षेत्र में बाजार अग्रणी है तथा टीएमटी बार में दूसरा सबसे बड़ा बाजार हिस्सेदार है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 में इस्पात उत्पादन के दौरान लगभग 6 मिलियन टन स्क्रैप उत्पन्न हुआ। इस्पात मंत्रालय की स्क्रैप पुनर्चक्रण नीति, 2019, विभिन्न स्रोतों से प्राप्त फेरस स्क्रैप के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देती है, जिससे संसाधनों का कुशल उपयोग और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को बल मिलता है