प्रदेश में एमपी-एमएलए के खिलाफ पेंडिंग क्रिमिनल केसों से जुड़े मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि जिन केस की जांच पुलिस कर रही है। उन केस को केस ऑफिसर स्कीम में ले लिया है। इनमें केस ऑफिसर भी नियुक्त कर दिए हैं। लेकिन कुछ केस ऐसे भी हैं, जो सीबीआई के क्षेत्राधिकार के हैं। इन केस की जांच सीबीआई के पास है। जस्टिस इंद्रजीत सिंह व जस्टिस रवि चिरानिया ने सोमवार को राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद मामले की सुनवाई जनवरी के प्रथम सप्ताह में रखी है। हाईकोर्ट कर रहा मामलों की मॉनिटरिंग
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2023 में एमपी-एमएलए से जुड़े क्रिमिनल केसों के मामले में दिशा-निर्देश जारी कर हाईकोर्ट को इन केसों की मॉनिटरिंग के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को कहा था कि वे इन केसों के संबंध में स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेकर इसे दर्ज करें। साथ ही इन केसों की ट्रायल कर रहे जिला जज या स्पेशल कोर्ट की मॉनिटरिंग करें। इसके अलावा हाईकोर्ट एमपी-एमएलए से जुड़े केसों की सुनवाई करने वाली संबंधित ट्रायल कोर्ट से रिपोर्ट मांगे। यदि जरूरत हो तो इन केसों की सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट भी बनाई जाए। कोर्ट ने पूछा था कब से मामले पेंडिंग
इससे पहले हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए एमपी-एमएलए के खिलाफ पेंडिंग क्रिमिनल केसों में संबंधित कोर्ट को कहा था कि वे इन केसों की ट्रायल जल्द पूरी करें। साथ ही राज्य सरकार से कहा था कि वह चार्ट सहित यह बताएं कि कौनसा केस कितने साल से पेंडिंग चल रहा है और उसका क्या स्टेटस है। तब राज्य सरकार ने कहा था कि वह इन केसों की मॉनिटरिंग कर रही है और इनकी ट्रेकिंग के लिए नोडल अफसर नियुक्त किए गए हैं।
