जोधपुर के कुड़ी भगतासनी हाउसिंग बोर्ड थाने में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच विवाद का वीडियो सोमवार देर रात सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में थाने में मौजूद थानाधिकारी और वकीलों के बीच तीखी नोकझोंक, धक्का-मुक्की और शांतिभंग में बंद करने की धमकी जैसे दृश्य सुनाई-दिखाई दे रहे हैं। घटना के बाद वकील संगठनों ने पुलिस कमिश्नर से दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। घटना की जानकारी मिलने के बाद देर रात को ही वकील कुड़ी भगतासनी थाने के बाहर एकत्र होना शुरू हो गए, जो अभी भी धरना देकर बैठे हैं। अधिवक्ता नवनीत ने बताया कि यहां धरने पर बैठे सभी वकीलों की मांग है वकीलों से दुर्व्यवहार करने वाले थानाधिकारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने के साथ अन्य दोषी पुलिसकर्मियों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर सुबह इस आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पुलिस ने देर रात 1:15 बजे जारी किया स्पष्टीकरण कुड़ी थाने के घटनाक्रम और इसके बाद देर रात थाने के बाहर वकीलों के प्रदर्शन के बीच पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश की ओर से एक जानकारी साझा की गई। इसमें बताया गया कि 1 दिसंबर को थाना कुड़ी भगतासनी में वकीलों एवं स्थानीय पुलिसकर्मियों के बीच हुए घटनाक्रम के संबंध में किसी भी अधिवक्तागण को धारा 170 BNSS के तहत गिरफ्तार नहीं किया गया है। घटना के संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, एडीसीपी (पश्चिम) रोशन मीणा से जांच करवाई जा रही है। जांच रिपोर्ट मिलने के आधार पर विधिसम्मत कार्यवाही की जाएगी। यह है मामला जानकारी के अनुसार एडवोकेट भरतसिंह राठौड़ और उनके साथ एक महिला एडवोकेट सोमवार को कुड़ी भगतासनी थाने पहुंचे थे। वे एक दुष्कर्म प्रकरण में पीड़िता की ओर से पुलिस से मिलकर आरोपी की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे। आरोप है कि थाने में एक पुलिसकर्मी बिना वर्दी के समझाइश और बयान ले रहा था, जिस पर वकीलों ने आपत्ति जताई और यूनिफॉर्म में ड्यूटी करने की बात कही। ‘151 में बंद कर दूंगा…’ – वीडियो में सुनाई दिए तीखे शब्द वायरल वीडियो के अनुसार, वकील पुलिसकर्मी से पूछते हैं कि वे वर्दी में क्यों नहीं हैं और थाने में ड्यूटी पर होते हुए बिना यूनिफॉर्म कैसे बैठे हैं। इस पर थानाधिकारी हमीरसिंह ऊंची आवाज में कहते नजर आते हैं कि “तुझे क्या करना है? तू वीडियो क्यों बना रहा है, बंद कर इसे।” जब वकील यह कहते हैं कि “वीडियो बनाना मेरा अधिकार है, मैं वकील हूं, मुझे कानून पता है”, तो अधिकारी की ओर से “वकील है तो क्या हुआ, ज्यादा नेतागिरी मत कर, अभी 151 में बंद कर दूंगा, सारी वकालत निकल जाएगी” जैसे शब्द सुनाई देते हैं। बीच-बचाव कर रही महिला वकील के विरोध करने पर भी अधिकारी कथित तौर पर कहते हैं, “लीगल-वीगल सब यहीं रह जाएगा, इसको 151 में बंद करो, शांतिभंग कर रहा है” और आगे “दुर्व्यवहार क्या होता है अब बताऊंगा, बाहर निकालो इनको” जैसी आवाजें रिकॉर्ड में सुनाई देती हैं। धक्का-मुक्की और वीडियो बनाने पर भी आपत्ति वकीलों का आरोप है कि थानाधिकारी ने भरतसिंह राठौड़ को धक्का देकर बाहर निकालने की कोशिश की और पुलिसकर्मियों से उन्हें शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार करने को कहा। वीडियो में शोर और हलचल के बीच वकील यह कहते सुनाई देते हैं कि “आप वर्दी में नहीं हैं और ऊपर से दादागिरी कर रहे हैं, ये वीडियो सब देखेंगे।” पुलिसकर्मी कथित तौर पर वकीलों को धमकाते भी दिखते हैं कि थाने के अंदर वीडियो नहीं बना सकते और मोबाइल नीचे करने के लिए दबाव डालते हैं। वकील संगठनों की आपात बैठक, 2 दिसंबर को न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय इस घटना के बाद राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन और राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन, जोधपुर की संयुक्त बैठक बुलाई गई। दोनों बार संघों के पदाधिकारियों ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि कुड़ी थाना पुलिस द्वारा एडवोकेट भरतसिंह राठौड़ एवं अन्य अधिवक्ताओं के साथ थाने में की गई कथित मारपीट, अभद्रता और शांतिभंग में बंद करने की धमकी अत्यंत गंभीर है। पत्र में कहा गया है कि अधिवक्ताओं के साथ हुए इस व्यवहार से न्यायिक कार्यों की गरिमा और निष्पक्षता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। संयुक्त निर्णय के अनुसार 2 दिसंबर को राजस्थान हाईकोर्ट और सभी अधीनस्थ न्यायालयों में अधिवक्ता न्यायिक कार्य का स्वैच्छिक बहिष्कार करेंगे। बार संघों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन आगे भी तेज किया जा सकता है। अधिवक्तागण हाईकोर्ट परिसर से लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय तक रैली और ज्ञापन देने पर भी विचार कर रहे हैं। बार संघों की मांगें और अगला कदम एडवोकेट्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अपने पत्र में मांग की है कि कुड़ी भगतासनी थाने के संबंधित थानाधिकारी और पुलिसकर्मियों के खिलाफ निष्पक्ष विभागीय जांच कर उन्हें निलंबित किया जाए। साथ ही, भविष्य में वकीलों और पुलिस के बीच समन्वय के लिए स्पष्ट SOP बनाने की बात भी उठाई गई है, ताकि थानों में कानूनी सहायता देने पहुंचे अधिवक्ताओं के साथ इस तरह की स्थिति दोबारा न बने। उधर, वकील संगठनों ने यह भी कहा है कि वे पीड़ित पक्ष के साथ खड़े हैं और दुष्कर्म पीड़िता को न्याय दिलाने की लड़ाई जारी रखेंगे। फिलहाल बार संघों के बहिष्कार और प्रस्तावित घेराव के चलते मामला और तूल पकड़ता दिख रहा है, जबकि पुलिस प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। थाने के बाहर देर रात प्रदर्शन की तस्वीरें…
