शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया आम आदमी पार्टी (आप) के नेता संजय सिंह से जुड़े मानहानि मामले में आज अमृतसर की अदालत में पेश हुए। सुनवाई के दौरान क्रॉस एग्जामिनेशन की प्रक्रिया पूरी की गई। अदालत के बाहर मीडिया से बात करते हुए मजीठिया ने बताया कि इस मानहानि मामले में मूल रूप से तीन आरोपी थे, अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह और आशीष खेतान। उन्होंने दावा किया कि अरविंद केजरीवाल और आशीष खेतान ने उनसे माफी मांग ली थी, जिसके बाद उन्होंने दोनों को माफ कर दिया था। संजय सिंह पर मामले को खींचने का आरोप मजीठिया ने आरोप लगाया कि संजय सिंह ने इस मामले को जानबूझकर लंबे समय तक खींचने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यह केस लगभग 10 वर्षों से चल रहा है और इस दौरान कई बार तारीखें पड़ीं, जबकि संजय सिंह चार बार अदालत में पेश नहीं हुए। मजीठिया ने न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि सच्चाई की जीत होगी। उन्होंने पंजाब सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए। मजीठिया ने कहा कि पंजाब सरकार इस निजी मानहानि मामले में सरकारी वकीलों का इस्तेमाल कर रही है, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार सीधे तौर पर इस मामले में दखल दे रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जैसे आम आदमी पार्टी के अन्य नेता पार्टी छोड़कर जा रहे हैं, कहीं संजय सिंह भी न भाग जाएं।” मजीठिया ने पंजाब विजिलेंस ब्यूरो पर उठाए सवाल इस दौरान मजीठिया ने पंजाब विजिलेंस ब्यूरो पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विजिलेंस ब्यूरो को पंजाब का “सबसे भ्रष्ट विभाग” बताया। मजीठिया ने सीबीआई द्वारा विजिलेंस दफ्तर पर की गई छापेमारी का हवाला देते हुए कहा कि आजाद भारत के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब भ्रष्टाचार रोकने वाले विभाग पर ही भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते छापेमारी हुई हो। मजीठिया ने आरोप लगाया कि विजिलेंस विभाग का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने और सौदेबाजी के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर पहले कार्रवाई की गई, बाद में उन्हीं के साथ समझौते कर उन्हें सरकारी कार्यक्रमों में सम्मानित किया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब पुलिस और विजिलेंस ब्यूरो का इस्तेमाल राजनीतिक हितों के लिए किया जा रहा है, जिससे कानून व्यवस्था और प्रशासनिक प्रणाली प्रभावित हो रही है।
