देशभर में 3 मई को हुई नीट यूजी को पेपर लीक की आशंकाओं के बीच एनटी ने रदद कर दिया। परीक्षा का आयोजन राजस्थान के 27 जिलों के 611 केंद्रों पर हुआ था। प्रदेश में करीब 2 लाख स्टूडेंट्स ने एग्जाम दिया था। वहीं कोटा में 37 हजार स्टूडेंटस ने परीक्षा दी थी। मंगलवार को परीक्षा रदद होने की जानकारी मिलते ही स्टूडेंट्स में निराशा का माहौल हो गया। कोई स्टूडेंट तीन साल तो कोई चार साल से परीक्षा की तैयारी कर रहा था लेकिन पेपर लीक से जुडे कुछ लोगों की वजह से उनकी सालों की मेहनत पर पानी फिर गया। परीक्षा खत्म होने के तीन दिन बाद ही एनटीए ने प्रोविजनल आंसर की जारी कर दी थी। इसके बाद कई छात्रो को उम्मीद थी कि उन्हें इस बार सरकारी कॉलेज में एडमिशन मिल जाएगा, उनकी मेहनत सफल हुई। लेकिन पेपर लीक की आशंकाओ के बाद अब उनकी मेहनत पर पानी फिर गया। भास्कर ने उन स्टूडेंटस से बात की जिन्होंने इस साल नीट की परीक्षा दी थी और उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलने की पूरी उम्मीद थी…….. दो साल की मेहनत खराब कर दी
छात्रा ओजस्वनी विजय ने बताया कि नीट पेपर रदद होने की सूचना मेरे लिए शॉकिंग है। मैनें इसके लिए दो साल मेहनत की थी। मेरा सपना था कि मैं डॉक्टर बनूंगी, इसके लिए दिन देखा न रात देखी, बहुत मेहनत की। प्रोविजनल आसंर की जारी होने के बाद अपने आप पर प्राउड फील हो रहा था। लेकिन अब ऐसी खबर सुनकर, इसे स्वीकार करना भी मुश्किल हो रहा है। नीट में प्रश्न कैसे आ रहे है, एग्जाम कठिन है या सरल, इससे मतलब नहीं होता, सारा खेल माइंड सेट का होता है। मेरा माइंड सेट था, पूरी तैयारी के साथ परीक्षा दी थी। अब वापस एनटीए कितना समय देगा यह पता नहीं है। दोबारा माइंड सेट करना और वह भी तब जब आपका पेपर बढिया गया हो और एन वक्त पर पेपर ही रदद कर दो, संभव नहीं होता है। ऐसा नहीं है कि दो साल पढाई की तो कुछ याद नही है, याद सब होता है लेकिन दिक्कत है अपने आप को फिर से दिमागी रूप से तैयार करने की, उसमें समय लगता है। बीमार हुए लेकिन फिर भी क्लास नहीं छोड़ी
मूल रूप से भीलवाडा की रहने वाली छात्रा जीया कोटा में रहकर नीट की तैयारी कर रही थी। उसने इस साल नीट का एग्जाम दिया था। जीया ने बतया कि ये मेरा पहला प्रयास था। मैनें बहुत मेहनत की थी, और मैनें ही क्या, मेरे क्लासमेटस को भी बहुत मेहनत करते मैनें देखा है। पढ़ाई के लिए मैनें खाना तक छोड़ दिया था, कि दिन में समय मिला तो खा लिया या रात में समय मिला तो खा लिया। एक टाइम खाना खाते थे ताकि समय खराब न हो। पूरा मन लगाकर पढ़ाई की, घूमना फिरना छोड दिया। स्थिति यह थी कि बीमार है, बुखाार आ रहा है तो भी क्लास मिस नहीं करते थे। हमेशा ये लगता था कि पढाई के लिए समय बहुत कम है, सिर्फ मेहनत से ही कामयाबी मिलेगी। मेरा पांच सौ से ज्यादा स्कोर जा रहा था लेकिन अब जब आज पेपर रदद की सूचना आई तो खुद को शर्म आ रही है कि क्या कहूं। ये जानकार पेरेंटस तो परेशान है हीं, स्टूडेंटस की मनोस्थिति पर क्या असर पड़ रहा है ये कोई नही समझ सकता। ऑटो चालक पिता का सपना पूरा हो जाता
छात्र अली अरमान ने भी इस साल नीट का पेपर दिया था। अली ने बताया कि- एग्जाम के लिए क्लास रूम के अलावा रोज सेल्फ स्टडी को नौ घंटे दिए। अपना खुद का पूरा कंफर्ट छोड दिया था। अली केपिता ऑटो चलाते है। अली ने कहा कि पिता सबसे कहते थे कि बेटा डॉक्टर बनेगा। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि मैं डॉक्टर बन जाऊंगा। आसंर की के अनुसार मुझे आराम से बीडीएस कॉलेज मिल जाता लेकिन लेकिन अब फिर से अपने आप को तैयार करना पडे़गा, ये आसान नहीं होता है। खुद को फिजिकली और दिमागी रूप से तैयार करना पड़ता है। अगर एनटीए से पेपर सही से नहीं हो रहे हैं तो दूसरी एंजेसी को इसका जिम्मा दे देना चाहिए। उनकी लापरवाही की सजा स्टूडेंटस क्यूं भुगते। जेईई की तर्ज पर होने चाहिए नीट एग्जाम
परीक्षा रदद होने के साथ ही स्टूडेंटस, पेरेंटस और एजुकेशन एक्सपर्टस का कहना है कि नीट की परीक्षा का आयोजन जेईई की परीक्षा की तर्ज पर होना चाहिए। एजुकेशन एक्सपर्ट नितिन विजय ने कहा कि नीट की परीक्षा विश्व की दूसरी सबसे बड़ी परीक्षा है जो कि ऑफलाइन मोड पर आयोजित होती है। इसका पेपर बनने के बाद सेंटर पर पहुंचते तक कई हाथों से गुजरता है, ऐसे में लीक होना कोई बड़ी बात नहीं है। जब पेपर लीक नहीं रोक पा रहे हैं तो नीट की परीक्षा जेईई की तर्ज पर करवानी चाहिए। जेईई का पेपर ऑनलाइन मोड पर आयोजित होता है। पेपर टफ होता है, और एक नहीं कई पेपर एक साथ तैयार किए जाते है। ऐसे में लीक की संभावनाएं नहीं रहती। अभी तक जेईई के पेपर लीक की सूचनाएं नहीं आई क्योंकि उसका सेटअप ही ऐसा है।