राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि बहू अनुकंपा नियुक्ति की हकदार है। जस्टिस रवि चिरानियां ने यह आदेश सुंदरी देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने मामले में नाराजगी जताते हुए कहा- जब 2023 में ही हाईकोर्ट की डिवीजन बैंच यह तय कर चुकी है कि बहू भी बेटी के समान ही अनुकम्पा नियुक्ति की हकदार है तो विभाग द्वारा उठाई गई आपत्तियां विधि सम्मत नहीं हैं। मामले में कोर्ट ने 9 अप्रैल को फैसला सुनाया था। बेटे की जगह बहू ने किया था आवेदन वकील आरसी गौत्तम ने कोर्ट को बताया- मृत्यु के बाद बहू ने अपने ससुर के स्थान पर अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। क्योंकि मृतक के बेटे का पहले ही एक्सीडेंट हो गया था। वह पूरी तरह से बेड पर था। लेकिन विभाग ने उनकी अनुकम्पा नियुक्ति के आवेदन पर कोई विचार नहीं किया। तीस दिन में नियुक्ति देने के आदेश अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा- याचिकाकर्ता के पति की मौत भी 25 मई 2020 को हो गई। उसके बाद परिवार के सभी आश्रित याचिकाकर्ता पर ही निर्भर हैं। अदालत ने कहा कि हमें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि डिवीजन बेंच द्वारा निर्धारित कानून को जानते हुए भी विभाग ने वर्तमान मामले में अपने जवाब में वही आपत्ति उठाई है, जिन्हें पहले ही हाईकोर्ट खारिज कर चुका है। कोर्ट ने कहा विभाग याचिकाकर्ता को 30 दिन में नियुक्ति दें। बिना एक दिन की देरी के नियुक्ति दें कोर्ट ने कहा कि यह उम्मीद की जाती है कि याचिकाकर्ता के मामले पर विचार करते समय प्रतिवादी कोई और तकनीकी आपत्ति नहीं उठाएंगे और बिना किसी देरी के एक दिन की भी देरी किए बिना अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करेंगे। यदि प्रतिवादी विभाग द्वारा अनावश्यक विलंब किया जाता है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए अवमानना ​​की कार्रवाई शुरू की जाएगी। अदालत ने 45 दिन में अनुपालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए। ये भी पढ़ें… अनुकंपा नियुक्ति- भाई के इनकार पर विवाहित बहन हकदार:हाईकोर्ट के आदेश के 9 महीने बाद सरकार ने दिया आदेश, विवाहित बेटी को मिलेगी सरकारी नौकरी राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने हाईकोर्ट की फटकार और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार जोधपुर की प्रियंका माथुर को अनुकंपा नियुक्ति दी। विभाग ने 24 दिसंबर को आदेश जारी कर प्रियंका को कनिष्ठ सहायक (LDC) के पद पर नियुक्त किया है। (पूरी खबर पढ़ें)