भरतपुर के पूर्व राजपरिवार में मोतीमहल पर रियासत कालीन झंडा लगाने को लेकर विवाद थम नहीं रहा है। पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वेंद्र सिंह ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है, जिसमें लिखा है- 13 फरवरी को महाराजा सूरजमल की जयंती के दिन मैं खुद झंडा लगाऊंगा। किसी में हिम्मत है तो रोक कर दिखा देना मुझे, भरतपुर राजपरिवार में पिछले 5 सालों से चला आ रहा पारिवारिक विवाद सुलझने के कगार पर ही था कि मेरी पत्नी व बेटे ने भरतपुर का रियासतकालीन झंडा अभी तक नहीं लगाने के कारण यह विवाद फिर से उलझ गया है। बता दें, इससे पहले मोती महल पर रियासतकालीन झंडे की जगह युद्ध भूमि का झंडा लगाया गया था, जिस पर सर्व समाज ने कड़ी आपत्ति जताई थी। इसको लेकर 2025 सितंबर माह में जिले के अलग-अलग इलाकों में पंचायतें हुई थीं। पंचायतों में यह निर्णय लिया गया था कि 21 सितंबर 2025 को मोती महल से युद्ध भूमि का झंडा हटाकर रियासतकालीन झंडा लगाया जाएगा। 22 सितंबर को एक युवक ने झंडा हटा दिया। तब से लेकर अब तक मोती महल पर कोई भी झंडा नहीं लगा है। विश्वेंद्र सिंह ने कहा- विवाद सुलझने के कगार पर था, लेकिन… विश्वेन्द्र सिंह ने पोस्ट में लिखा-भरतपुर राजपरिवार में पिछले 5 सालों से चला आ रहा पारिवारिक विवाद सुलझने के कगार पर ही था कि मेरी पत्नी व बेटे ने भरतपुर का रियासतकालीन झंडा अभी तक नहीं लगाने के कारण यह विवाद फिर से उलझ गया है। या तो मेरी पत्नी व बेटा भरतपुर रियासत के झंडे को फिर से लगा दें, नहीं तो मैं स्वयं 13 फरवरी को महाराजा सूरजमल जी के जन्मदिवस के अवसर पर खुद मोती महल जाकर रियासतकालीन झंडा लगाऊंगा। हालांकि रियासतकालीन झंडे की रस्सी व तार काट दिए गए हैं, मैं तब भी झंडे को फहराकर आऊंगा। किसी में हिम्मत है तो रोक कर दिखा देना मुझे। अब जानिए पूरा मामला पहले मोती महल पर रियासतकालीन झंडे की जगह युद्ध भूमि का झंडा लगाया गया था, जिस पर सर्व समाज ने कड़ी आपत्ति जताई थी। इसको लेकर 2025 सितंबर माह में जिले के अलग-अलग इलाकों में पंचायतें हुई थीं। पंचायतों में यह निर्णय लिया गया था कि 21 सितंबर को मोती महल से युद्ध भूमि का झंडा हटाकर रियासतकालीन झंडा लगाया जाएगा। इससे पहले 18 सितंबर की रात किसी अज्ञात व्यक्ति ने युद्ध भूमि के झंडे को नुकसान पहुंचाया, जिसके बाद मोती महल पर तिरंगा झंडा लगा दिया गया। संभावित तनाव को देखते हुए 21 सितंबर को शहर में जगह-जगह पुलिस तैनात की गई और मोती महल के सभी गेटों पर भारी पुलिस जाब्ता लगाया गया। गेट तोड़कर घुसा युवक, फिर हटाया था झंडा 21 सितंबर की रात सिनसिनी निवासी मनुदेव ने गाड़ी से मोती महल का पिछला गेट तोड़ दिया और परिसर में घुस गया था। इसके बाद 22 सितंबर को मोती महल से झंडा हटा दिया गया था। तब से लेकर अब तक मोती महल पर कोई भी झंडा नहीं लगा है। विवादों में रहा भरतपुर का पूर्व राजपरिवार
भरतपुर पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वेंद्र सिंह का पत्नी दिव्या सिंह और बेटे अनिरुद्ध सिंह से लंबे समय से विवाद चल रहा है। विवाद की जड़ राजघराने की करोड़ों की प्रॉपर्टी, बेशकीमती स्वर्ण-आभूषण और एंटीक आइटम का शाही भंडार है। विवाद की शुरुआत करीब एक साल पहले विश्वेंद्र सिंह की ओर से उपखंड अधिकारी ट्रिब्यूनल भरतपुर में प्रार्थना पत्र देकर वरिष्ठ नागरिक के रूप में पत्नी और बेटे से भरण-पोषण मांगने से हुई थी। — पूर्व राजपरिवार के विवाद की ये खबर भी पढ़ें … भरतपुर पूर्व राजपरिवार का झंडा विवाद:40 साल पहले राजा का पुलिस एनकाउंटर, 77 साल पहले जाना पड़ा तिहाड़ जेल भरतपुर के पूर्व राजपरिवार में मोतीमहल पर रियासत कालीन झंडा लगाने को लेकर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। पूरी खबर पढ़िए भरतपुर मोतीमहल में थम गया झंडा विवाद:बेटे ने फहराया तिरंगा, विश्वेन्द्र भी बोले- ये सर्वोपरि, रियासती झंडे को लेकर अड़े समर्थक भी अब माने भरतपुर पूर्व राजपरिवार में चल रहा झंडा विवाद शनिवार दोपहर में पूरी तरह शांत हो गया है। नया विवाद मोती महल पर फहरा रहे झंडे को लेकर हुआ था। पूरी खबर पढ़िए