नमस्कार डोटासराजी ने यह कहकर दिल तोड़ दिया कि भरतपुर वाले रास्ता बताने का भी पैसा मांगते हैं। जयपुर में वकील साहब को थाने में पुलिसवाले ने पीट दिया। खाद्य विभाग के सचिव साहब एक मीटिंग बुलाकर चर्चा में हैं और विधायक बाबाजी की गलती पर संगठन के मुखिया को माफी मांगनी पड़ी। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. PCC चीफ ने तोड़ा भरतपुर वालों का दिल चीफ साहब जोश में थे। वे भरतपुर के बयाना पहुंचे थे। सभा को संबोधित कर रहे थे। जोश-जोश में जरा ‘इधर-उधर’ निकल गए। राजनीतिक कटाक्ष करने के चक्कर में इलाके पर ही सवाल उठा दिया। बोले- भरतपुर के लोग तो रास्ता बताने का भी पैसा मांगते हैं। बात तीखी थी। भरतपुर वालों का दिल टूटना ही था। टूटा भी। इसके बाद भाजपा जिलाध्यक्ष शिवानी दायमा अपने कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर उतर गईं। नारेबाजी की, पुतला फूंका। पलटवार करते हुए बोलीं- डोटासरा साहब वैर इलाके से भरतपुर में घुसे हैं। वह इलाका कांग्रेस नेता भजनलाल जाटव का है, या तो उन्होंने रास्ता बताने के पैसे लिए होंगे, या फिर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने। फिलहाल पुतला राख होने तक मामला भी ठंडा हो गया। 2. वकील साहब की थाने में पिटाई वकील साहब एक्सीडेंट का केस लेकर थाने पहुंचे। थाने वालों ने कहा कि मामला दुर्घटना का है, दुर्घटना थाने जाइए। वकील साहब दस्तावेज संभाल दुर्घटना थाने पहुंचे। वहां कहा गया कि एक्सीडेंट जिस थाना क्षेत्र में हुआ है, उसी थाने में जाइए। वकील साहब थाने लौट आए और मुकदमे को लेकर बात की। इस पर 2 पुलिसवाले भड़क गए। मौसम में इतनी गर्मी नहीं, जितना उनका दिमाग गर्म। एक पुलिसवाले ने वकील का गिरेबान पकड़ लिया। दीवार में सटा दिया। आरोप है कि मारा-पीटा, गाली दी, एक्सेक्ट्रा..एक्सेक्ट्रा। बात आग की तरह वकीलों की बीच फैल गई। पीड़ित वकील के पक्ष में वकील जुट गए। कोर्ट की सीढ़ियों पर खड़े होकर जाना-माना नारा लगाया- वकील एकता जिंदाबाद। ये सारा मामला राज्य की राजधानी में हुआ। विधानसभा से महज 100 मीटर दूर के थाने में हुआ। सोचिए, थानों में वकीलों के साथ मारपीट हो रही है तो आम आदमी के साथ कैसा सुलूक होता होगा? गौर करने वाली बात है। बाकी वकील और पुलिस का वही मामला है- थारी-म्हारी बणै नहीं, थारे बिना सरै नहीं। (अर्थात- तुम्हारी और मेरी बनती नहीं, और तुम्हारे बिना काम चलता भी नहीं।) 3. गुरुभक्त IAS सचिव साहब गुरु की कृपा बनी रहनी चाहिए। गुरु बिन ज्ञान नहीं। गुरु गोविंद से भी बड़ा है, उसके पाय पहले पकड़ने चाहिए। गुरु के लिए कुछ भी करना चाहिए तो कर गुजरना चाहिए। ज्यादा करके कम समझना चाहिए। सच्चा शिष्य वही जो सबसे ऊंचे ओहदे पर गुरुजी को रखे। जयपुर में एक IAS अधिकारी ऐसे ही गुरुभक्त निकले। वे एक विभाग के सचिव हैं। विभाग की अहम बैठक के नाम पर उन्होंने 300 से ज्यादा अफसरों को इकट्‌ठा कर लिया। अफसर भी डायरी पेन लेकर पहुंच गए। सभागार में जाकर देखा कि बड़े पर्दे पर मशहूर गुरुजी ज्ञान दे रहे हैं। योग-आसन की तरकीबें बता रहे हैं। एक पोस्टर पर लिखा था कि गुरुजी के फाउंडेशन से शारीरिक-मानसिक शांति और स्वास्थ्य लाभ के लिए विविध कोर्स महज 4 से 26 हजार में मुहैया हैं। अफसरों को वहीं योग-प्राणायाम करा दिया गया। कई अफसर एक-दूसरे की शक्ल देखने लगे। हो क्या रहा है? सचिव साहब ने फरमान सुनाया- फलां फाउंडेशन से जुड़ जाइए। कोर्स कर लीजिए। सचिव साहब गुरुजी के परम शिष्य निकले। ऐसी बैठकों का क्या किया जाए? एक ही इलाज है, जो गुरुजी ने बताया है- दोनों हथेलियां आपस में रगड़िए और आंखों पर रख लीजिए। 4. चलते-चलते.. जो भावना भरतपुर के लिए डोटासराजी के मन में है, कुछ-कुछ वैसी ही भावना विधायक बाबाजी के मन में एक खास समाज को लेकर है। बाबाजी ने टपूकड़ा में सड़क का निरीक्षण-परीक्षण किया। कंक्रीट-सीमेंट की परत की मोटाई का पता रोड को खोदकर लगाया। फिर JEN को फोन लगाकर फटकार लगाई। कहा- तू जेईएन है या नाई है? इस बयान के बाद सैन समाज गुस्सा हो गया। रोष फैलना ही था। किसी वर्ग या समाज को टारगेट क्यों करना? बाबाजी का तो पता नहीं लेकिन संगठन के मुखियाजी बात को भांप गए। एक पत्रकार के सवाल पर तुरंत बोले- संगठन का मुखिया होने के नाते बाबाजी की तरफ से मैं माफी मांगता हूं। इनपुट सहयोग- दिनेश पालीवाल (जयपुर), गौरव माथुर (भरतपुर), अनूप कौशिक (भिवाड़ी)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी