टोंक जिले के नटवाड़ा गांव में अक्षय तृतीया पर बद्री विशाल मंदिर में दो दिवसीय वार्षिक मेला रविवार सुबह कनक दण्डवत यात्रा और ध्वजारोहण के साथ शुरूआ। इसमें ठाकुर लक्ष्मण करण राठौड़ के सानिध्य में अन्न और ध्वजा पूजन हुआ और शोभायात्रा निकाली गई। ध्वजारोहण के बाद मंदिर शिखर पर पक्षी नहीं बैठा, लेकिन चली ठंडी हवा को ग्रामीणों ने शुभ संकेत माना। ग्रामीणों के अनुसार यह मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही लोक आस्था और परंपरा का जीवंत स्वरूप है। वर्षों से प्रचलित रीति के अनुसार नटवाड़ा ठिकाने के गढ़ में ठाकुर लक्ष्मण करण राठौड़ के सानिध्य में उनके पुत्र कुं. पुण्य प्रताप करण एवं चाणक्य प्रताप करण की उपस्थिति में विधिवत मंत्रोच्चार के साथ सात प्रकार के अन्न और ध्वजा का पूजन किया गया। इसके बाद बैंड-बाजों, शंख-नगाड़ों की गूंज और “बद्री विशाल भगवान” के जयकारों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। गढ़ से मंदिर तक निकली शोभायात्रा पूजन के बाद बैंड-बाजों, शंख-नगाड़ों और जयकारों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। यह गढ़ से शुरू होकर सीतारामजी, मुख्य बाजार, हताया मोहल्ला और जाटों के मोहल्ले से होती हुई मंदिर पहुंची। मार्ग में महिलाओं के मंगल गीत और ढोल-नगाड़ों की आवाज के बीच श्रद्धालु शामिल रहे। मंदिर में पूजा और ध्वजा फहराई गई मंदिर पहुंचने पर पुजारी जितेंद्र भारती ने ध्वजा भगवान के चरणों में अर्पित कर पूजा की। इसके बाद गांव के पंच-पटेलों की मौजूदगी में मंदिर शिखर पर ध्वजा फहराई गई।

पक्षी नहीं बैठा, हवा को माना संकेत लोक मान्यता के अनुसार ध्वजारोहण के बाद मंदिर शिखर पर बैठने वाले पक्षी के आधार पर नव संवत्सर का शगुन देखा जाता है। इस बार तय समय में पक्षी शिखर पर नहीं बैठा, जिससे श्रद्धालुओं में हल्की मायूसी रही। हालांकि ध्वजा फहराने के बाद चली ठंडी हवा को ग्रामीणों ने शुभ संकेत माना। प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम अंत में श्रद्धालुओं को भीगी चने की दाल और पतासों का प्रसाद वितरित किया गया। यह मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा और लोक विश्वास को दर्शाता है।
इनपुट: रितेश पारीक, नटवाड़ा ।