फरीदकोट के मिनी सचिवालय में सोमवार को उस समय माहौल गरमा गया जब पंचायत विकास सचिव यूनियन और मनरेगा स्टाफ यूनियन ने जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) कम एडीसी के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने अधिकारी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए उनके तत्काल तबादले की मांग की है। यूनियन के नेताओं का आरोप है कि उक्त अधिकारी द्वारा ‘मुख्यमंत्री राहत फंड’ और ‘रंगला पंजाब फंड’ के नाम पर पंचायत सचिवों से जबरन धन इकट्ठा किया गया है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वसूली गई इस भारी-भरकम राशि की न तो कोई रसीद दी गई और न ही इसे सरकारी खजाने में जमा करवाया गया। नेताओं और प्रशासन की चुप्पी पर उठाए सवाल प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वे इस मामले को लेकर पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां, फरीदकोट और जैतो के विधायकों के साथ-साथ डिप्टी कमिश्नर (डीसी) को भी मिल चुके हैं। यूनियन का कहना है कि प्रशासन द्वारा कार्रवाई का आश्वासन तो दिया गया, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। उल्टा,संबंधित अधिकारी द्वारा पंचायत सचिवों को मानसिक रूप से प्रताड़ित और अपमानित किया जा रहा है। पंचायत सचिव यूनियन के जिला प्रधान केवल सिंह का कहना है कि अधिकारी द्वारा लाखों रुपये की वसूली की जा चुकी है। यह पैसा कहाँ गया, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। अगर जल्द ही उक्त अधिकारी का तबादला नहीं किया गया, तो हम एक बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। सरकार के भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के दावे पर सवाल पंचायत यूनियन के प्रधान गुरशविंदर सिंह ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर मुख्यमंत्री भगवंत मान भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर ठोस शिकायतों के बावजूद एक दागी अधिकारी को बचाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि कर्मचारियों का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अधिकारी बोले- “मामला केवल गलतफहमी का” इन गंभीर आरोपों के बीच डीडीपीओ कम एडीसी संदीप मल्होत्रा ने अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने इन सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह पूरा विवाद कर्मचारियों के बीच फैली एक “गलतफहमी” का नतीजा था। मल्होत्रा के अनुसार, डिप्टी कमिश्नर ने दोनों पक्षों की बैठक करवाकर इस गलतफहमी को दूर कर दिया है और अब कर्मचारी पूरी तरह संतुष्ट हैं। हालांकि, यूनियन के कड़े तेवर और धरने को देखते हुए लगता है कि कर्मचारियों और प्रशासन के बीच की यह खाई अभी पूरी तरह भरी नहीं है।