रेलवे स्टेशनों पर अब मानवीय चूक या लापरवाही की गुंजाइश खत्म होने वाली है। ट्रेनों के संचालन और ट्रैक बदलने (पॉइंट सेट करने) के दौरान होने वाली गलतियों को रोकने के लिए जोधपुर मंडल के 112 स्टेशनों पर ‘सेफ्टी अलार्म पॉइंट यूनिट’ (SPAU) सिस्टम लगाया गया है। इस नए सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत इसका ‘3 मिनट का काउंटडाउन’ है। जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुँचती है, यह सिस्टम सक्रिय हो जाता है और समय पर काम पूरा न होने पर तेज शोर के साथ स्टाफ को अलर्ट कर देता है। जोधपुर मंडल ने इस सिस्टम को अलग-अलग रेलखंडों में बाँटा है। खास बात यह है कि राईका बाग से जैसलमेर के बीच सबसे ज्यादा 21 सिस्टम लगाए गए हैं, ताकि इस महत्वपूर्ण रूट पर सुरक्षा पुख्ता रहे। 3 मिनट की देरी और बज जाएगा अलार्म रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही ट्रेन स्टेशन पर आती है, स्टेशन मास्टर के पैनल पर एलईडी लाइट जलने लगती है और एक बजर बजता है। यह संकेत होता है कि ट्रेन आ चुकी है और अब आगे की प्रक्रिया (जैसे ट्रैक बदलना या शंटिंग) शुरू करनी है। अगर ट्रेन आने के 3 मिनट के भीतर ट्रैक बदलने वाले पॉइंट्स सही तरीके से सेट नहीं किए गए, तो सिस्टम से तेज ऑडियो-विजुअल अलार्म बजने लगेगा। यह अलार्म तब तक नहीं रुकेगा जब तक स्टाफ अपनी गलती सुधार कर काम पूरा नहीं कर लेता। जैसलमेर रूट पर सबसे ज्यादा निगरानी जोधपुर मंडल ने इस सिस्टम को अलग-अलग रेलखंडों में बाँटा है। खास बात यह है कि राईका बाग से जैसलमेर के बीच सबसे ज्यादा 21 सिस्टम लगाए गए हैं, ताकि इस महत्वपूर्ण रूट पर सुरक्षा पुख्ता रहे। अक्सर शंटिंग या क्रॉसओवर के समय छोटी सी मानवीय भूल बड़े हादसे का कारण बन जाती है। अपर मंडल रेल प्रबंधक करनीराम के अनुसार, यह सिस्टम एक ‘बैकअप’ की तरह काम करेगा। इसे सीधे सिग्नल और इंटरलॉकिंग सिस्टम से जोड़ा गया है, जिससे ट्रैक और सिग्नल की निगरानी एक साथ हो सकेगी। अब स्टेशन मास्टर या संबंधित स्टाफ चाहकर भी काम में देरी नहीं कर पाएगा। मंडल में कहाँ कितने सिस्टम: