सांभर लेक में प्रवासी पक्षियों की मौत के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। डीडवाना- कुचामन जिले के नावां क्षेत्र से सटे सांभरलेक एरिया में गत सप्ताह प्रवासी पक्षियों की मौत के मामले सामने आना शुरू हुए थे, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया और प्रभावित क्षेत्र में 8 संयुक्त टीमें बनाकर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। दरअसल, 30 अक्टूबर को प्रवासी पक्षियों की मौत के मामले सामने आने शुरू हुए थे। अब तक सरकारी आंकड़ों के लिहाज से अब तक कुल 66 मृत पक्षी झील से पाए गए। जबकि 33 घायल पक्षी रेस्क्यू किए गए थे, जिनमें से अब तक केवल 8 पक्षी जो शुरुआती स्टेज के इन्फेक्शन में थे, उनको स्वस्थ होने के बाद वापस झील क्षेत्र में छोड़ दिया गया। झील से रेस्क्यू किए गए पक्षियों में से भी तकरीबन दो दर्जन पक्षियों की मौत हो चुकी है। रेस्क्यू सेंटर प्रभारी बोले- संक्रमित पक्षियों की इम्यूनिटी कमजोर हुई
नावां के मिठड़ी में बनाए गए रेस्क्यू सेंटर प्रभारी का कहना है- पशुपालन विभाग के चिकित्सकों द्वारा इनकी देख रेख की जा रही है। लेकिन केवल वही पक्षी सर्वाइव कर पा रहे हैं जो केवल शुरुआती स्टेज में ही हैं। उसके बाद इन पक्षियों को बचा पाना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि इसके बाद वो उड़ना और चलना तो दूर खाना भी खुद से नहीं खा पाते। उन्होंने बताया कि पशुपालन विभाग के चिकित्सकों द्वारा हमें भी ट्रेंड किया गया है और हम ऐसे पक्षियों को सिरिंज के जरिए भी खाना खिला रहे हैं। इनके लिए अलग से वार्ड भी बनाया गया है। इनका इम्यूनिटी सिस्टम डाउन होने की वजह से रात को इन्हें गर्म कंबलों में रखा जा रहा है ताकि वे सर्वाइव कर सकें। काफी प्रयासों के बाद भी गंभीर रूप से संक्रमित पक्षी नहीं बच पा रहे हैं। हालांकि वनविभाग, पशुपालन और एनिमल हसबेंडरी डिपार्टमेंट की टीमों के प्रयास से और प्रशासन की सजगता की वजह से इस बार शुरुआती स्टेज में ही रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए जाने की वजह से यह संक्रमण ज्यादा नहीं फैला और पैनिक वाली स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। डीडवाना जिला कलक्टर ने महेंद्र सिंह खड़गावत ने बताया कि प्रशासन की सतर्कता की वजह से इस मामले समय रहते कंट्रोल कर लिया गया। संयुक्त टीमें लगातार पूरे एरिया में घूम रही है जो भी पक्षी घायल या मृत अवस्था में मिल रहे हैं उनको कलेक्ट किया जा रहा है। घायलों का प्रॉपर इलाज भी करवाया जा रहा है और पक्षियों को बचाया भी गया है। साथ ही सांभर सॉल्ट की कमियों को भी नोटिस किया है, इससे जुड़ी समस्याओं को सॉल्व करेंगे, जिससे पक्षियों को परेशानी नहीं हो। बता दें कि 90 किमी के दायरे में सांभर झील फैली है, जिसकी सीमाएं 3 जिलों से लगती है। हालांकि प्रवासी पक्षियों की मौत के मामले अब धीरे धीरे कम हो रहे हैं।
