बाड़मेर में अपने भाई को डॉक्टर बनाने का सपना देखने वाले भाइयों ने मजदूरी की तो किसी ने सेना में जाने का सपना छोड़ कर पत्थर उठाए। किसी के पिता की मौत हुई तो मां ने मजदूरी कर बेटे को नीट की तैयारी करवाई। किसी ने 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ी और टीचर के कहने पर फिर से शुरुआत की। आज री-नीट के सफल स्टूडेंट्स की लिस्ट में इनका नाम है। बाड़मेर की फिफ्टी विलेजर्स सेवा संस्थान में पढ़ने वाले 27 स्टूडेंट्स ने नीट परीक्षा पास की है। ये संस्थान गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा देता है। पढ़िए बाड़मेर से री-नीट में सफल होने वाले स्टूडेंट्स की कहानियां… मुझे पढ़ाने के लिए भाई ने अपनी पढ़ाई छोड़ी मगाराम ने नीट में ऑल इंडिया 27279वीं रैंक हासिल की है। 564 नंबर आए है। मगाराम ने 10वीं सरकारी स्कूल पचपदरा से की। मगाराम ने बताया- मैं जब 3 दिन का था मेरे पिताजी की रोड एक्सीडेंट में डेथ हो गई थी। उसके बाद घर की सारी जिम्मेदारी मेरे मां पर आ गई थी। मां ने दिहाड़ी मजदूरी करने के साथ नरेगा में काम करके हम दोनों भाइयों को पढ़ाया। 10वीं करने के बाद बड़े भाई ने मुझे पढ़ाने के लिए अपनी पढ़ाई तक छोड़ दी। गुजरात जाकर बोरियां डालने का काम करने लगा। मगाराम ने आगे बताया- भाई को 15-20 हजार रुपए के आसपास मजदूरी मिलती थी। हम दो भाई और दो बहने है। बहनें ससुराल रहती है। डॉक्टर बनने के बाद जब भी मैं आऊंगा तो गांव में ही ड्यूटी लूंगा। गांव के लोगों की सेवा करूंगा। हमारे गांव में हेल्थ की सुविधा नहीं थी। उसको देखकर मैंने मन में ठान लिया कि मुझे डॉक्टर बनना है। मेरा सपना है कि मैं न्यूरोलॉजिस्ट बनने का सपना है। पिता बीमार रहते, मां का निधन हुआ नीट में 1041 रैंक हासिल करने वाले पोलाराम ने बताया- 10वीं मैंने गांव की सरकारी स्कूल से की थी। तब मुझे चूनाराम सर ने फिफ्टी विलेजर्स संस्थान के बारे में बताया। मैंने वहां पर फॉर्म भरा। फिर हमारे घर और आर्थिक स्थिति का वेरिफिकेशन किया गया। इसके बाद मेरा सलेक्शन हुआ। यहां पर फ्री में रहना, पढ़ना और रहना हो गया। दो साल में 11 और 12वीं की। फिर नीट की तैयारी की इस बार मेरा सलेक्शन हो गया। यहां पर तीन साल तैयारी की। दसवी 85 प्रतिशत नंबर आए थे। पोलाराम का कहना है कि मेरे पिता जी की उम्र 65 साल है। वो मजदूरी पर जा नहीं पा रहे। मां का देहांत साल 2021 में हो गया था। साल 2023 में मेरे भाई ने 12वीं की और कमाने वाला कोई नहीं था। भाई ने होटल पर मजदूरी करना शुरू की और मैं यहां पर पढ़ने के लिए यहां पर आ गया। मेरी चार बहने है तीन ससुराल जाती है और सबसे छोटी बहन घर का काम करती है। बड़े भाई ने कहा कि मैं मजदूरी पर चला जाता हूं, तूं पढ़ाई कर लें। हम दोनों ही पढ़ाई में होशियार थे। उसका सेना में जाने का सपना था और तैयारी कर रहा था। अग्निवीर दौड़ में रह गया था। फिर उसने तैयार की नहीं और घर की स्थिति खराब थी। कोचिंग जाकर हम पढ़ नहीं सकते है वहां पर लाखों रुपए लगते है। इतनी हमारी इनकम नहीं है। मैं यह नहीं सोचा कि मैं टॉप एक हजार के पास पहुंच जाऊंगा। मेरी रैक ऑल इंडिया में 1041 आई है। कैटगरी रैक 341 आई है। मेरा सपना डॉक्टर बनने के साथ अच्छा इंसान बनने का सपना था। पोलाराम ने कहा- मां की डेथ के बाद बड़ा दुख हुआ। कमाने वाला कोई नहीं था, लगा कि पढ़ाई छूट जाएगी। घर की स्थिति खराब थी। मजदूरी करने वाला बनेगा डॉक्टर लाखाराम ने नीट में ऑल इंडिया 15283 रैंक हासिल की है। ओबीसी रैंक 7120 रही। लाखाराम ने बताया- मेरी बहन के ससुराल में मैंने 5वीं तक पढ़ाई की। उसके बाद मेरे घर से 7 किलोमीटर दूर सरकारी स्कूल बोथिया जागीर स्कूल से 10वीं तक पढ़ाई की। टीचर महेश कुमार गुर्जर ने मेरा बहुत सपोर्ट किया। उन्होंने मुझे फिफ्टी विलेजर्स संस्थान के बारे में बताया। साल 2023 से अब तक 11वीं, 12वी पास की है। नीट रिजल्ट को क्रेक किया। लाखाराम ने मेरे पिता तुलसाराम जी किसान है पहले गुजरात में बोरियां डालने का काम करते थे। इसके बाद भाग्यम वेलपेड पर काम करते थे। वहां 11-12 हजार सैलेरी थी। 9 भाई बहन है। बहने ससुराल जाती है। तीन भाइयों ने घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पढ़ाई छोड़ दी थी। मजदूर करते है। लाखाराम ने कहां- गर्मी की छुटिट्यों में डेढ़ माह तक कमठा मजदूरी की। उस समय मुझे 350 रुपए मिलते थे। मेरा सलेक्शन बीकानेर फिफ्टी विलेजर्स में हुआ था। एक साल रहने के बाद मेरी तबीयत बिगड़ने के बाद मुझे बाड़मेर विफ्टी विलेजर्स में आ गया। यहां पर पढ़ाई 10-12 घंटे पढ़ाई हो जाती है। मुझे जितनी उम्मीद थी उससे मेरे कम नंबर आए है। लाखाराम के 10वीं 84 प्रतिशत और 12वीं 87.80 प्रतिशत नंबर प्राप्त किए है। नीट में 586 नंबर आए है। 10वीं के बाद पढ़ाई छुटी सवाईसिंह ने नीट में ऑल इंडिया में 15039वीं रैंक हासिल की है। EWS में 1709वीं रैंक आई है। 587 नंबर आए है। मेरे परिवार में 6 भाई बहनें है। इसमें चार बहनों की शादी हो रखी है। वहीं एक छोटी बहन है। मेरे पिता का देहांत 24 जून 2023 को गया था। इससे पहले पिता पैर से विकलांग थे। 10वीं के बाद मेरी पढ़ाई छूट गई। मैंने मजदूरी भी की, लेकिन मेरे टीचरों ने मुझे संस्थान के बारे में बताया। वहां पर मेरा एडमिशन हो गया। 15 साल में 150 बच्चों का चयन इस मौके पर संस्थान के फाउंडर डॉ. भरत शर्मा ने बताया- 15 साल में 150 बच्चों का डॉक्टर में चयन हुआ है। साल 2026 में 34 बच्चों ने एग्जाम दिया है। 17 बच्चे सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS के लिए जाएंगे। वहीं वेटेनरी और BDS मिलाकर 27 से 28 बच्चें सरकारी कॉलेज में जाएंगे।
