राजस्थान के सबसे बड़े अस्पताल (SMS) में आखिर आग कैसे लग गई? पूरा प्रदेश इस सवाल का सच्चा जवाब जानना चाहता है। सच्चा जवाब इसलिए, क्योंकि सरकारी कमेटियों की जांच और उनके दावों पर यहां की जनता को कोई भरोसा नहीं है। इतिहास गवाह है कि ज्यादातर जांचें जिम्मेदारों को क्लीन चिट ही देती हैं। झालावाड़ में इसी साल स्कूल की छत गिरने से 7 बच्चों की मौत हाे गई। प्रशासन ने तथ्यात्मक रिपोर्ट में शिक्षा विभाग को बचाते हुए सारा दोष ग्राम पंचायत के निर्माण पर डाल दिया। खांसी की दवा पीने से 4 बच्चों की मौत हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग मानने की तैयार नहीं कि मौत की वजह कफ सिरप है। पहले कफ सिरप से बच्चों की मौत और अब प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में आग। गजेंद्रसिंह खींवसर ने चुनावों से पहले मूंछ दांव पर लगाकर कहा था- हार गया तो मूंछ-बाल मुंडवा लूंगा। अब बतौर स्वास्थ्य मंत्री सिर्फ उनकी मूंछें ही नहीं पूरी प्रतिष्ठा दांव पर है। किसने दी आईसीयू के पास कबाड़ रूम बनाने की परमिशन?
राजस्थान में स्कूल हो या अस्पताल की बिल्डिंग पूरी तरह भगवान भरोसे है। SMS के ट्रॉमा सेंटर की बिल्डिंग तो ज्यादा पुरानी भी नहीं है, फिर भी इतना बड़ा हादसा कई सवाल उठाता है। सरकारें हमेशा संवेदनशील और जवाबदेह होने के दावे करती हैं तो ये जरूर बताएं पिछली बार अस्पताल में फायर सेफ्टी का ट्रायल कब हुआ था? किसे ट्रेनिंग दी गई थी। और अगर दी गई थी तो चंद कदम की दूरी पर सिस्टम होने के बाद भी वो क्यों काम नहीं आया। वैसे भी यहां तो हर कुछ महीनों में कोई न कोई नई आपदा तैयार रहती है। कभी आग लगती है। कभी प्लास्टर टूटता है। कभी अस्पताल में बारिश का पानी भर जाता है। एक और बड़ा सवाल आईसीयू के पास किसने स्टोर रूम और कबाड़ रूम बनाने की इजाजत दी? क्या ऐसी कौनसी गाइडलाइन भी है। विधानसभा में सीसीटीवी लगाने की चिंता सबको होती है, लेकिन प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की सुरक्षा की कितनी चिंता है? अस्पतालों में हेलीपेड बनवाने वाले आईसीयू के पास कबाड़खाना क्यों बनने देते हैं? जिम्मेदारों को ये जरूर बताना चाहिए। क्या अस्पताल अधीक्षक और प्रिसिंपल की जिम्मेदारी सिर्फ वीआईपी को अटैंड करने की ही है? क्रिकेट पर चंद मिनटों में ट्वीट, अग्निकांड पर संवेदना जताने में 9 घंटे लग गए
पिछले दिनों बच्चे की आंख निकालने के सवाल पर प्रेस क्रॉन्फ्रेंस छोड़कर भागने वाले हमारे हेल्थ मिनिस्टर गजेंद्र सिंह खींवसर अब भी अपनी जिम्मेदारी से दूर भाग रहे हैं। इतने बड़े हादसे के बाद आखिर कहां व्यस्त हैं? गूगल मैप के अनुसार, खींवसर से जयपुर पहुंचने में बमुश्किल 6 घंटे लगते हैं। आखिर क्या वजह है कि आपको जयपुर एसएमएस अस्पताल पहुंचने में 17 घंटे लग गए। जबकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और अन्य कई मंत्री और विपक्ष के नेता पहुंच गए थे। क्रिकेट मैच पर चंद मिनटों में एक्स (ट्विटर) पर प्रतिक्रियां देने वाले मंत्रीजी भीषण अग्निकांड के सवा 9 घंटे बाद एक्स पर ही नजर आते हैं। ऐसा क्यों? …वरना अस्पतालों से जुड़ी जिंदगी की उम्मीद टूट जाएगी
सच ये है कि भावनाएं और संवेदनाएं वोटों तक सीमित होती हैं। सरकारों और नेताओं को इससे कोई वास्ता नहीं होता। गरीब आदमी जिसे सरकारी तंत्र पर ही भरोसा होता है, लेकिन उसे अव्यवस्थाओं की आग में हमेशा उसे ही झुलसना पड़ता है। दरअसल, हर हादसे और मौत को जांचों में दफन कर लिया जाता है। जिम्मेदारों को क्लीन चिट देकर बचा लिया जाता है। छोटे-छोटे अपराधियों के जुलूस निकालकर वाहवाही लूटने वाले तंत्र को जनता को बताना चाहिए कि 8 लोगों की हत्या के लिए जिम्मेदार कौन है? और उनके साथ क्या सुलूक किया जाएगा। आखिर कब तक आम आदमी यूं ही मरता रहेगा? नेताओं और बड़े लोगों के लिए तो फाइव स्टार हॉस्पिटल हैं, लेकिन आम आदमी तो सरकारी अस्पताल की तरफ ही देखता है। इन सरकारी अस्पतालों को बूचड़खाना मत बनाइए। वरना अस्पतालों से जुड़ी जिंदगी की उम्मीद टूट जाएगी। अब एसएमएस अस्पताल को सर्जरी की जरूरत
अगर सरकार सच में संवेदनशील है…तो जनता को इसका सबूत देना चाहिए कि वो वाहवाही नहीं लूटेगी, बल्कि ऐसा एक्शन लेगी जिससे जिम्मेदार थर्र-थर्र कांपेंगे। पूरे सिस्टम पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो, क्योंकि ये सिस्टमैटिक मर्डर है। जिम्मेदारों का कानूनी इलाज होना चाहिए तभी जनता का भरोसा जीतेगा। क्योंकि अब SMS अस्पताल की पूरी सर्जरी का समय आ गया है। छोटे-मोटे सुधार से इतने बड़े अस्पताल में कुछ भी ठीक होने वाला नहीं है। …और अंत में ये शपथ याद कीजिए मंत्रीजी! …ताकि सवालों से न भागना पड़े हादसे से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िएः 1. जयपुर के SMS हॉस्पिटल में आग, 8 मरीजों की मौत:ट्रॉमा सेंटर के ICU में देर रात हुआ हादसा, शॉर्ट सर्किट होने का अनुमान 2. जयपुर के SMS अस्पताल में 8 मौतों के 9 जिम्मेदार:मंत्री-सचिव से लेकर इंजीनियर-ICU इंचार्ज की अनदेखी पड़ी भारी, मरीजों ने जान देकर चुकाई कीमत 3. परिजनों का दावा – जलते मरीजों को छोड़कर भागा स्टाफ:20 मिनट पहले ही बताया था आग लगी; किसी का मुंह जला, किसी ने दम घुटने से तोड़ा दम 4. ‘पैरों में कांच चुभ गए, पत्नी को नहीं बचा सका’:SMS अस्पताल में आग के बीच अपनों को बचाने घुसे थे लोग,बोले- कंपाउंडर गेट बंद कर निकला 5. जयपुर के SMS हॉस्पिटल में आग भड़कने के 3 कारण:वार्ड में जहां बेड लगने थे, कबाड़ भर दिया; स्मॉक डिटेक्टर ने काम नहीं किया 6. SMS में आग से 8 की मौत का एनिमेशन VIDEO:आईसीयू में धुआं भरने से मरीजों का दम घुटा, परिजन बचाने की कोशिश करते रहे 7. SMS अग्निकांड में 16 से ज्यादा मरीजों को बचाया:चिल्लाने की आवाज सुनकर दौड़े, खिड़कियों के कांच तोड़े; मरीजों को उठाकर बाहर निकाला 8. 8 जान लेने वाली SMS-अस्पताल की आग 13 तस्वीरों में:ICU के मरीजों को सड़क पर रखना पड़ा, खुद परिजन लेकर भागे; मंत्री पर भड़के