एसएमएस हॉस्पिटल के ट्रोमा सेंटर में हुई आगजनी की घटना में 8 लोगों की जान चली गई। इस घटना में फायर फाइटिंग सिस्टम के ऑपरेशन पर सवाल उठ रहे हैं। एसएमएस के ट्रॉमा सेंटर में आग भड़कने के तीन कारण सामने आए हैं। जिसके कारण आग पूरे आईसीयू में फैल गई और धुएं में मरीजों का दम घुट गया। सबसे पहले जानिए आग भड़कने के तीन कारण… 1. स्मॉक अलार्म ही काफी देरी से बजा
सूत्रों का कहना है कि यहां जो सिस्टम लगा है, उसमें स्मॉक अलार्म ही काफी देरी से बजा। इसके कारण स्टोर में लगी आग का किसी को पता नहीं चला। स्टोर रूम की आग बढ़ गई और उसका धुआं निकलकर आईसीयू रूम तक फैला। तब स्टाफ और मरीजों के परिजनों को पता चला। अफरा-तफरी मच गई। हालांकि प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि स्मॉक अलार्म समय पर बजा, तभी स्टाफ को आग लगने की सूचना मिली और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। 2. वार्ड को बना दिया स्टोर रूम, भर दिया जरूरत से ज्यादा सामान
आईसीयू वार्ड के जिस स्टोर रूम में आग लगी, वह वास्तविक में वार्ड का ही हिस्सा था। यहां मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड लगाए जाने थे, लेकिन बाद में इसे स्टाफ ने ही स्टोर रूम में बदल दिया। इसके बाद यहां जरूरत से ज्यादा कबाड़ (दवाइयों के बॉक्स, गत्ते और अन्य कागजात) रख दिया। इस कारण जब यहां आग लगी तो इस कबाड़ के कारण बहुत आग तेजी से बढ़ गई। फैलते-फैलते आईसीयू वार्ड तक आ गई और पूरे आईसीयू को चपेट में ले लिया। 3. पुरानी तकनीक का फायर फाइटिंग सिस्टम
इस आईसीयू में पुरानी तकनीक का फायर फाइटिंग सिस्टम लगा था। ऑटोमैटिक वाटर सप्लाई के लिए फायर स्प्रिंकलर सिस्टम के बजाए मेनुअल सिस्टम लगे होने के कारण यहां आग लगने के तुरंत बाद पानी की सप्लाई नहीं हुई। इसके अलावा यहां तैनात स्टाफ और सुरक्षा गार्ड को भी ये नहीं पता था कि इस मेनुअल सिस्टम को वाटर सप्लाई के लिए कहां से कनेक्टिविटी दी जा सके। 11 मरीज, 5 काे सुरक्षित निकाला
इस मामले में एसएमएस हॉस्पिटल के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने बताया- न्यूरोसर्जरी आईसीयू के जिस वार्ड में आग लगी थी, उसमें 11 बेड की क्षमता है। यहां सभी बेड पर गंभीर मरीज भर्ती थे। …………………… हादसे से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िएः स्वास्थ्यमंत्रीजी! छुपिए मत, मूंछें ही नहीं पूरी प्रतिष्ठा दांव पर:बताइए 8 मौतों का जिम्मेदार कौन? दोषियों को सजा मिलेगी या क्लीनचिट राजस्थान के सबसे बड़े अस्पताल (SMS) में आखिर आग कैसे लग गई? पूरा प्रदेश इस सवाल का सच्चा जवाब जानना चाहता है। सच्चा जवाब इसलिए, क्योंकि सरकारी कमेटियों की जांच और उनके दावों पर यहां की जनता को कोई भरोसा नहीं है। इतिहास गवाह है कि ज्यादातर जांचें जिम्मेदारों को क्लीनचिट ही देती हैं। (पूरी खबर पढ़ें) 1. जयपुर के SMS हॉस्पिटल में आग, 8 मरीजों की मौत:ट्रॉमा सेंटर के ICU में देर रात हुआ हादसा, शॉर्ट सर्किट होने का अनुमान 2. परिजनों का दावा – जलते मरीजों को छोड़कर भागा स्टाफ:20 मिनट पहले ही बताया था आग लगी; किसी का मुंह जला, किसी ने दम घुटने से तोड़ा दम 3. ‘पैरों में कांच चुभ गए, पत्नी को नहीं बचा सका’:SMS अस्पताल में आग के बीच अपनों को बचाने घुसे थे लोग,बोले- कंपाउंडर गेट बंद कर निकला 4. जयपुर के SMS हॉस्पिटल में आग भड़कने के 3 कारण:वार्ड में जहां बेड लगने थे, कबाड़ भर दिया; स्मॉक डिटेक्टर ने काम नहीं किया 5. SMS में आग से 8 की मौत का एनिमेशन VIDEO:आईसीयू में धुआं भरने से मरीजों का दम घुटा, परिजन बचाने की कोशिश करते रहे 6. SMS अग्निकांड में 16 से ज्यादा मरीजों को बचाया:चिल्लाने की आवाज सुनकर दौड़े, खिड़कियों के कांच तोड़े; मरीजों को उठाकर बाहर निकाला 7. 8 जान लेने वाली SMS-अस्पताल की आग 13 तस्वीरों में:ICU के मरीजों को सड़क पर रखना पड़ा, खुद परिजन लेकर भागे; मंत्री पर भड़के