जैसलमेर जिले के शिक्षकों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर गुरुवार को सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ‘अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ’ के बैनर तले बड़ी संख्या में शिक्षक कलेक्ट्री परिसर में एकत्रित हुए और अपनी आवाज बुलंद की। शिक्षकों ने राजस्थान सरकार की नीतियों और नौकरशाही के रवैये पर कड़ा एतराज जताते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों की मुख्य मांगों में ग्रीष्मकालीन अवकाश और पूर्ववत छुट्टियों को बहाल करना शामिल रहा। साथ ही उन्होंने शिक्षा विभाग में बढ़ते अनावश्यक ऑनलाइन कार्य के बोझ को बंद करने और संविदा पर कार्यरत शिक्षकों को नियमित करने व RGHS (स्वास्थ्य सुविधा) में आ रही बाधाओं को दूर करने की भी पुरजोर मांग उठाई। मांगें नहीं मानी जाने पर आंदोलन की भी चेतावनी दी। कलेक्ट्रेट परिसर में की नारेबाजी कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने जमकर नारेबाजी की। शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अनोप सिंह सोनू का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से संवाद कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन और विभाग की ओर से केवल उदासीनता मिल रही है। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो शिक्षक पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इन प्रमुख मांगों पर अड़े शिक्षक शिक्षकों की मुख्य मांगों में ग्रीष्मकालीन अवकाश और पूर्ववत छुट्टियों को बहाल करना, RGHS (स्वास्थ्य सुविधा) में आ रही बाधाओं को दूर करना और तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण व रुकी हुई पदोन्नति प्रक्रिया को शुरू करना शामिल है। साथ ही, उन्होंने शिक्षा विभाग में बढ़ते अनावश्यक ऑनलाइन कार्य के बोझ को बंद करने और संविदा पर कार्यरत शिक्षकों को नियमित करने की भी पुरजोर मांग उठाई। शिक्षक नेताओं ने कहा कि ग्रीष्मकालीन अवकाश शिक्षकों का अधिकार है, जिसे ‘शिविरा कैलेंडर’ में बदलाव कर प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा, ऑनलाइन रिपोर्टिंग और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों के कारण शिक्षकों का ध्यान मूल शिक्षण कार्य से हटकर केवल कागजी कार्रवाई में उलझ गया है। उग्र आंदोलन की चेतावनी दी प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार शिक्षकों के धैर्य की परीक्षा न ले। वर्तमान में राजस्थान के लाखों शिक्षकों में आक्रोश व्याप्त है। यदि सरकार ने सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।