पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी को उसकी शैक्षणिक योग्यता और निर्धारित कैडर से हटाकर अन्य पद पर तैनात करना नियमों के खिलाफ है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के फैसले न केवल नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि जनहित को भी प्रभावित कर सकते हैं। मामला महेंद्र सिंह से जुड़ा है, जिन्हें जूनियर इंजीनियर (मैकेनिकल) के पद से हटाकर नगर निगम पानीपत में बिल्डिंग इंस्पेक्टर के पद पर ट्रांसफर किया गया था। याचिकाकर्ता ने इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि यह उनकी योग्यता के विपरीत है और हरियाणा म्युनिसिपल कॉरपोरेशन सर्विस रूल्स, 1998 का उल्लंघन करता है। तीनों कैडर अलग जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि जूनियर इंजीनियर (सिविल), मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल तीन अलग-अलग कैडर हैं और इनके लिए अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता निर्धारित है। कोर्ट ने कहा कि मैकेनिकल इंजीनियर को सिविल कार्यों से जुड़े बिल्डिंग इंस्पेक्टर के पद पर तैनात करना नियमों के खिलाफ है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह की पोस्टिंग से कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और इससे सार्वजनिक हित को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। बिल्डिंग इंस्पेक्टर का काम पूरी तरह सिविल इंजीनियरिंग से संबंधित होता है, जबकि याचिकाकर्ता का अनुभव मैकेनिकल क्षेत्र में है। ट्रांसफर सेवा का हिस्सा, लेकिन नियम जरूरी सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि ट्रांसफर आदेश सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी नहीं किया गया था। कोर्ट ने कहा कि नियमों के अनुसार स्थानांतरण केवल नियुक्ति प्राधिकारी या राज्य सरकार ही कर सकती है, जबकि इस मामले में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रांसफर सेवा का सामान्य हिस्सा होता है, लेकिन इसे नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत ही किया जाना चाहिए। मनमाने या बिना अधिकार के किए गए ट्रांसफर को स्वीकार नहीं किया जा सकता। याचिका स्वीकार, आदेश रद्द अंत में कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए 10 अगस्त 2022 के ट्रांसफर आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही संबंधित विभाग को निर्देश दिया कि यदि नया आदेश जारी करना हो तो वह नियमों के अनुसार और उचित कारणों के साथ किया जाए, तथा कर्मचारी को उसके मूल कैडर जूनियर इंजीनियर (मैकेनिकल) में ही तैनात रखा जाए।
