धौलपुर जिले में पिछले एक सप्ताह के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जिले में पेट्रोल अब 110.31 रुपये और डीजल 95.46 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है। लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है और इसका असर अब घरेलू बजट से लेकर बाजार तक साफ दिखाई देने लगा है। आम आदमी का बिगड़ रहा घरेलू बजट ईंधन की बढ़ती कीमतों से मध्यम वर्ग, किसान, मजदूर और छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आमदनी में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई, लेकिन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में परिवार का मासिक बजट संभालना मुश्किल होता जा रहा है।
महंगे ईंधन का बाजार पर सीधा असर लोगों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने का सीधा असर बाजार पर पड़ता है। माल ढुलाई की लागत बढ़ने से सब्जियां, फल, दालें, खाद्य तेल और मसालों सहित अन्य जरूरी वस्तुओं के दामों में भी बढ़ोतरी हो रही है। इसका अतिरिक्त बोझ आखिरकार आम उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है।
सरकार से राहत की मांग स्थानीय लोगों ने केंद्र सरकार से महंगाई पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि यदि ईंधन कीमतों में राहत मिलती है तो परिवहन लागत कम होगी और आवश्यक वस्तुओं के दामों पर भी नियंत्रण संभव हो सकेगा। लोगों का मानना है कि बढ़ती महंगाई का सबसे अधिक असर सीमित आय वाले गरीब, किसान और मजदूर वर्ग पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय हो रही कीमतों की दिशा आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव भारतीय बाजार पर पड़ता है। आने वाले दिनों में वैश्विक परिस्थितियों और सरकारी नीतियों के आधार पर ईंधन कीमतों की दिशा तय होगी। फिलहाल लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है और लोग राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।