शिक्षा सचिव के विशेषाधिकारी बीके गुप्ता की कथित टिप्पणी खुब चर्चा में है। शिक्षा निदेशक सीताराम जाट की मौजूदगी में शिक्षक संघ के नेताओं के साथ उनकी चल रही मीटिंग में गुप्ता ने आवेश में कहा था कि “कलेक्टर गया तेल लेने”। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद गुप्ता ने सफाई देते हुए कहा कि उनके आशय ऐसा नहीं था और अनजाने में यह बातचीत के प्रवाह में निकल गई थी। ऐसी मंशा नहीं थी। दरअसल नए शिक्षा सत्र की तैयारियों और नामांकन बढ़ाने से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा के लिए शिक्षक संगठनों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई। जयपुर में हुई बैठक के दौरान शिक्षा सचिव के विशेषाधिकारी बीके गुप्ता की जुबान फिसल गई और उन्होंने चर्चा के बीच “कलेक्टर गया तेल लेने” कह दिया। बैठक में निदेशक सीताराम जाट की मौजूदगी में विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि सुझाव दे रहे थे। तभी पंचायतीराज व माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष शेरसिंह चौहान ने नए सत्र में नामांकन बढ़ाने में आ रही समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सायरा ब्लॉक के भानपुरा उच्च माध्यमिक विद्यालय के गणित शिक्षक पिछले करीब 12 वर्षों से गोगुंदा उपखंड कार्यालय में प्रतिनियुक्ति पर कार्य कर रहे हैं। इस पर विशेषाधिकारी गुप्ता ने कहा कि यदि शिक्षक के स्कूल नहीं आने की जानकारी संघ की ओर से लिखित में दे दी जाए तो अगले दिन ही समाधान कर दिया जाएगा। चौहान ने जवाब में कहा कि इस मामले में समय-समय पर जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिए गए हैं। इस पर पूरी बात सुने बिना गुप्ता ने कह दिया, “कलेक्टर गया तेल लेने।” बाद में उन्होंने कहा कि शिक्षक संगठन अपनी बात शिक्षा विभाग से संबंधित रखें। पंचायतीराज व माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष शेरसिंह चौहान ने कहा कि जब संगठनों को चर्चा के लिए बुलाया जाता है तो उनकी पूरी बात सुननी चाहिए। शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने से पढ़ाई पर असर पड़ रहा है और यह समस्या प्रदेशभर में है, जिसे सरकार को गंभीरता से दूर करना चाहिए।
