शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में दो पारी में सेवाएं शुरू करने के निदेशालय के आदेश पर अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ ने आपत्ति जताई है। संघ का कहना है कि इस व्यवस्था से मरीजों को व्यवहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा और इलाज के लिए अनावश्यक समय भी बर्बाद होगा। संघ के प्रदेश महासचिव डॉ. दुर्गा शंकर सैनी ने बताया कि दो पारी व्यवस्था लागू होने से पहली पारी में आने वाले मरीजों की जांच सुबह होगी, लेकिन उन्हें डॉक्टर को दिखाने के लिए शाम तक इंतजार करना पड़ सकता है। इससे मरीजों को काफी असुविधा होगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सुबह से शाम तक चल रही एकल पारी व्यवस्था में मरीजों को लगातार और समुचित इलाज मिल रहा है। डॉ. सैनी ने बताया कि साल 2017 में तत्कालीन भाजपा सरकार के समय सेवारत चिकित्सक संघ के आंदोलन के बाद हुए समझौते के तहत सरकार ने परीक्षण करवाया था। उस दौरान यह माना गया था कि दो पारी व्यवस्था से मरीजों को अत्यधिक परेशानी होती है। इसके बाद विस्तृत परीक्षण के उपरांत मरीज हित को ध्यान में रखते हुए पुनः एकल पारी की व्यवस्था लागू की गई थी। उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान राज्य सरकार उस समय हुए परीक्षण और समझौते को गलत ठहराती है तो सेवारत चिकित्सक संघ इसका उचित जवाब देगा। संघ का कहना है कि प्रदेश के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर पहले से ही आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध हैं, ऐसे में दो पारी व्यवस्था लागू करना मरीजों के हित में नहीं है।