सिरोही जिले में एनीमिया मुक्त राजस्थान अभियान को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता एनीमिया स्टेट प्रोग्राम मैनेजर डॉ. मोलश्री राठौड़ ने की। इसमें चिकित्सा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा शिक्षा विभाग (माध्यमिक/प्राथमिक) के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में एनीमिया मुक्त भारत/राजस्थान कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की गई। अभियान को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए। निर्णय लिया गया कि ब्लॉक स्तर पर नियमित रूप से ब्लॉक कन्वर्जेंस कमेटी मीटिंग (BCCM) आयोजित की जाएगी, जिससे विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। विद्यालयों में बच्चों के लिए आयरन फोलिक एसिड (IFA) की गुलाबी एवं नीली गोलियों की मांग का आकलन हर तीन माह में अनिवार्य रूप से करने और उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। चिकित्सा विभाग को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और उपकेंद्र स्तर तक आईएफए दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए गए। साथ ही, विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों तक इनकी समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा गया। पीसीटीएस पोर्टल और शाला दर्पण पर समयबद्ध एवं सटीक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। अन्य महत्वपूर्ण निर्णयों में ‘शक्ति दिवस’ का प्रभावी आयोजन, ब्लॉक स्तर पर लक्ष्य निर्धारण, गूगल फॉर्म के माध्यम से रिपोर्टिंग और प्रत्येक ब्लॉक पर नोडल अधिकारी नियुक्त करना शामिल है। आईएफए डेटा, पीसीटीएस रिपोर्टिंग और शाला दर्पण से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर कार्यक्रम को और अधिक सुदृढ़ बनाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। स्टेट प्रोग्राम मैनेजर डॉ. मोलश्री राठौड़ ने अधिकारियों को बताया कि बच्चों में एनीमिया समाप्त करने के लिए माता-पिता को बचपन से ही प्रयास करने होंगे। उन्होंने छह माह की आयु से ही बच्चों को घर का बना खाना खिलाने और बाजार के पैक्ड खाद्य पदार्थों से परहेज करने की सलाह दी। इससे बचपन से ही बच्चों में खून की कमी नहीं होगी और उनके मस्तिष्क व शरीर का उचित विकास हो सकेगा। उन्होंने एनीमिया से ग्रसित बच्चों को सिरप या गोली खिलाना सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।