उदयपुर जिले के सायरा थाना क्षेत्र में 2 दिन पहले हुई एक बुजुर्ग की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। हत्या की यह वारदात महज मामूली गाली-गलौज और शराब के नशे में हुए विवाद की वजह से हुई। पुलिस ने इस मामले में एक महिला और उसके साथी को गिरफ्तार किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि हत्या के बाद आरोपियों ने पकड़े जाने के डर से बुजुर्ग की लाश को करीब 400 मीटर दूर घसीटकर खेत में डाल दिया था, ताकि मामला पुलिस की नजरों में न आए और किसी को उन पर शक न हो। सायरा थानाधिकारी कानाराम सीरवी ने बताया कि मोहनलाल मेघवाल (60) को शराब पीने की लत थी। वह अक्सर गांव में ही किराने की दुकान चलाने वाली डाली बाई के पास शराब पीने जाता था। वारदात वाले दिन भी मोहनलाल नशे में धुत होकर डाली बाई की दुकान पर पहुंचा। वहां किसी बात को लेकर उसका महिला से विवाद हो गया और मोहनलाल ने आपा खोते हुए उसे जमकर गालियां देना शुरू कर दिया। गालियां सुनकर महिला और वहां मौजूद देवाराम भड़क गए। गुस्सा इतना बढ़ा कि दोनों ने मिलकर लाठियों और लात-घूसों से मोहनलाल की बेरहमी से पिटाई कर दी। मारपीट इतनी जबरदस्त थी कि बुजुर्ग वहीं अचेत होकर गिर पड़ा। जब आरोपियों को लगा कि बुजुर्ग की हालत बिगड़ गई है, तो वे घबरा गए और पकड़े जाने के डर से उसे घसीटते हुए दुकान से दूर एक खेत में ले गए और पत्थरों की दीवार के पास सुला दिया। इस एक गलती से पुलिस के हत्थे चढ़े कातिल
वारदात के अगले दिन जब पूरे गांव में मोहनलाल की लाश मिलने की खबर फैली, तो लोग मौके पर जुटने लगे। लेकिन डाली बाई और देवाराम जानबूझकर भीड़ का हिस्सा नहीं बने और दिनभर अपने घर में ही छिपे रहे। पुलिस को बस इसी बात पर शक हो गया कि रोजाना दुकान पर आने वाले बुजुर्ग की मौत पर ये दोनों बाहर क्यों नहीं आए। सायरा थानाधिकारी कानाराम सीरवी ने टीम के साथ जब डाली बाई और देवाराम को हिरासत में लेकर अलग-अलग पूछताछ की, तो दोनों टूट गए और अपना जुर्म कबूल कर लिया। कोर्ट ने भेजा पुलिस रिमांड पर…
सायरा थाना पुलिस ने बताया कि पकड़ी गई आरोपी डाली बाई (42) और देवाराम (60) भीलों का तला के रहने वाले हैं। परिजनों की रिपोर्ट पर हत्या का मामला दर्ज कर दोनों को बुधवार को उदयपुर कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने पुलिस की दलीलें सुनने के बाद दोनों आरोपियों को एक दिन के पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है। फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस वारदात में कोई और भी शामिल तो नहीं था। इनपुट – गोपाल लोढ़ा, गोगुंदा।
