केंद्रीय श्रम संगठनों के संयुक्त राष्ट्रीय आह्वान पर स्थानीय श्रमिक संगठनों सीटू, एटक, इंटक और एचएमएस के पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार एवं भाजपा शासित राज्य सरकारों की कथित श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ राष्ट्रपति के नाम अतिरिक्त जिला कलेक्टर ब्रह्म जाट को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, भिवाड़ी और फरीदाबाद सहित देश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूर संगठनों द्वारा श्रमिक हितों एवं अधिकारों की रक्षा के लिए किए जा रहे आंदोलनों को कॉरपोरेट घरानों के इशारे पर दमनात्मक तरीके से कुचला जा रहा है। श्रमिक नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की। श्रमिक संगठनों ने मांग की कि सरकार द्वारा लागू किए गए चारों नए लेबर कोड को तत्काल निरस्त किया जाए और पुराने श्रम कानूनों को पुनः बहाल किया जाए। इसके साथ ही श्रमिकों को न्यूनतम वेतन, समय पर वेतन एवं ओवरटाइम भत्ते का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई। अन्य मांगों में न्यूनतम मासिक वेतन 26 हजार रुपए निर्धारित करना, ठेका प्रथा पर रोक लगाना और पिछले 10 वर्षों से लंबित भारतीय श्रम परिषद की बैठक शीघ्र बुलाना शामिल है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि निजी औद्योगिक संस्थानों एवं सरकार द्वारा सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है, जिससे श्रमिक वर्ग प्रभावित हो रहा है। श्रमिक संगठनों ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप कर श्रमिक विरोधी कार्यवाहियों पर रोक लगाने की मांग की। ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में सीटू के हेमचंद आर्य, दयाराम भगत, सचिन सांखला, एटक के पूनम सिंह चौहान, जगदीश प्रसाद और इंटक के नाथूलाल छत्रावत सहित विभिन्न श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
