करीब चार माह पहले राजस्थान हाईकोर्ट से पेपरलीक के आरोपी जगदीश विश्नोई को मिली जमानत को रद्द कराने के लिए राजस्थान सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं। आज जस्टिस संजय करोल और जस्टिस कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने सरकार की एसएलपी पर जगदीश विश्नोई को नोटिस जारी किए। सरकार की ओर से कहा गया कि गंभीर आरोपों और जांच में एकत्रित महत्वपूर्ण साक्ष्यों के बावजूद आरोपी को हाईकोर्ट ने 16 जनवरी को जमानत दे दी। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया एस डी संजय और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने जमानत जारी रखने का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी एसआई भर्ती-2021 से जुड़े संगठित पेपरलीक रैकेट का मास्टरमाइंड और किंगपिन था। इसने सह आरोपियों और सेंटर सुपरिंटेंडेंट राजेश खंडेलवाल से मिलकर व्हाट्सएप के जरिए 10 लाख रुपए में परीक्षा से पहले पेपर प्राप्त किया। उसके बाद उसे हल करवाकर भारी धनराशि लेकर अभ्यर्थियों तक पहुंचाया। जिन 25 अभ्यर्थियों को इसने लीक पेपर उपलब्ध करवाए, उन सभी का सलेक्शन भर्ती में हुआ। मामले में 150 गवाहों के बयान शेष
सरकार ने आगे कहा- जांच के दौरान आरोपी से एक अकाउंट डायरी बरामद हुई, जिसमें अभ्यर्थियों और पैसे के लेन-देन का विवरण दर्ज था। एफएसएल रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि डायरी में लिखावट जगदीश विश्नोई की ही थी। आरोपी साल 2008 से इस प्रकार की आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहा है और हिस्ट्रीशीटर है, जिसके खिलाफ समान प्रकृति के 13 अन्य आपराधिक मामले दर्ज हैं। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी अवगत कराया कि इस व्यापक साजिश के संबंध में कुल 139 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और वर्तमान में मुकदमा आरोपों पर बहस के चरण में लंबित है, जिसमें लगभग 150 गवाहों के बयान अभी होना शेष हैं। ऐसे में आरोपी की प्रभावशाली भूमिका को देखते हुए उसे जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी। जमानत मिलते ही किया था गिरफ्तार
दरअसल, आरोपी जगदीश विश्नोई को एसआई भर्ती पेपरलीक में 16 जनवरी को हाईकोर्ट की जयपुर पीठ से जमानत मिल गई थी। लेकिन जब वह 19 जनवरी को जेल से बाहर निकल रहा था, उसी समय एसओजी ने उसे साल 2020-21 में हुए पेपरलीक के मामले में गिरफ्तार कर लिया। जिसे आरोपी की पत्नी ने हाईकोर्ट जोधपुर बैंच में चुनौती देते हुए कहा कि उसके पति के खिलाफ चार साल पुराने मामले में केवल इसलिए नया मुकदमा दर्ज किया गया, जिससे उसे जमानत का लाभ नहीं मिल सके। इस पर सुनवाई के बाद 30 अप्रेल को हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देते हुए नया मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताया। जिसके बाद सरकार ने करीब चार महीने बाद हाईकोर्ट के 16 जनवरी के जमानत आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
