प्रदेश में पहली बार लैरिंक्स (आवाज़ के अंग) पर केंद्रित एक विशेष दो-दिवसीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कॉन्फ्रेंस में प्रदेशभर से लगभग 150 डॉक्टरों और स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट्स शामिल हुए। कॉन्फ्रेंस के दौरान आवाज खराब होने के विभिन्न कारणों, बोलने के बाद होने वाले लकवे (वोकल कॉर्ड पैरालिसिस) के उपचार और आधुनिक तकनीकों जैसे लेज़र, कोब्लेटर और स्ट्रोबोस्कोपी पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने गले के संक्रमण, निगलने से संबंधित समस्याओं, FEES जांच की उपयोगिता और न्यूरोलॉजिकल डिस्फेजिया पर भी गहन विचार-विमर्श हुआ। कॉन्फ्रेंस का प्रमुख आकर्षण “लाइव कैडावेरिक डिसेक्शन (Department of Anatomy)” रहा, जिसमें युवा ईएनटी सर्जन्स को लैरिंक्स की विभिन्न सर्जरी का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। इस हैंड्स-ऑन सत्र ने प्रतिभागियों को उन्नत सर्जिकल तकनीकों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। कॉन्फ्रेंस के चेयरपर्सन डॉ. मोहनीश ग्रोवर रहे, जबकि साइंटिफिक चेयरपर्सन डॉ. राघव मेहता थे। ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी के रूप में डॉ. मनीषा शर्मा, डॉ. पलक दीवान और डॉ. पायल कुंभट ने आयोजन की जिम्मेदारी संभाली। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एसएमएस मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग की एचओडी डॉ. रेखा हर्षवर्धन रहीं।