चिड़ावा (झुंझुनूं)। रोजाना की तरह दूध सप्लाई कर घर लौट रहे 55 वर्षीय मेहरचंद को यह अंदाजा नहीं था कि यह उनका आखिरी सफर साबित होगा। चिड़ावा बाइपास पर सांड के कारण हुए दर्दनाक हादसे में उनकी जान चली गई और पीछे उनका परिवार बेसहारा हो गया।