शहर के कोर्ट परिसर में शुक्रवार को एक अधिवक्ता को अपने पालतू बंदर को साथ लाना भारी पड़ गया। लाल मुंह वाले इस बंदर ने दो अधिवक्ताओं और एक कांस्टेबल को काट खाया। यह भीड़ के बीच भागा तो कोर्ट में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर पहुंची वाइल्ड लाइफ टीम ने उसे रेस्क्यू कर बायोलॉजिकल पार्क में छोड़ा। चौंकाने वाली बात यह है कि बंदर डेढ़ माह में 9 लोगों को काट चुका है।
अधिवक्ता नीलेश जैन शुक्रवार सुबह 11 बजे अपने पालतू बंदर को लेकर कोर्ट पहुंचे। नई बिल्डिंग के यहां से बंदर इधर-उधर उछल-कूद करने लगा। वहां मौजूद लोग डर गए और बचने के लिए इधर-उधर भागने लगे। ऐसे में बंदर ज्यादा उग्र हो गया और उत्पात मचाने लगा। अधिवक्ताओं की टेबलों पर रखे दस्तावेजों को बिखेर दिया। बंदर ने अधिवक्ता दिनेश विश्नोई के हाथ और पैर पर काट लिया। फिर अधिवक्ता प्रेमशंकर कुमावत और कांस्टेबल अशोक कुमार पर भी हमला कर दिया। इससे तीनों चोटिल हो गए और बचने के लिए भागे। बंदर को पकड़ने के लिए वाइल्ड लाइफ टीम को सूचना दी। फिर टीम ने कोर्ट पहुंचकर दोपहर 1 बजे उसके मालिक की मदद से बंदर को रेस्क्यू किया। लंबे समय से थी तलाश वाइल्ड लाइफ रेस्क्यूअर धर्मेंद्र पाणिगर ने बताया कि बंदर डेढ़ माह से शहर में उत्पात मचा रहा है। 45 दिन पहले नाकोड़ा नगर में लोगों को काट लिया था। 4-5 दिन पहले आरसीए में 4 लोगों और कुम्हारों के भट्टे पर 2 लोगों पर हमला किया था। हाल ही में शोभागपुरा में शोरूम के बाहर होने की सूचना मिली थी। काम की बात- घाव को बिना रगड़े तुरंत साफ करें, घरेलू उपाय से बचें, रेबीज वैक्सीन बंदर के काटने पर तुरंत साफ पानी और साबुन से कम से कम 15 मिनट तक घाव को धोएं। रगड़ें नहीं। घरेलू उपाय (हल्दी, चूना, राख, तेल) बिल्कुल न लगाएं। बंदर स्वस्थ दिख रहा है, यह सोचकर इलाज न टालें। तुरंत अस्पताल पहुंचे और रेबीज वैक्सीन लगवाएं। गहरा घाव है या खून बह रहा है। पीड़ित बच्चा, बुजुर्ग या कमजोर इम्युनिटी वाला व्यक्ति है तो ज्यादा सावधानी रखने की जरूरत है।
