किसान संघर्ष समिति के आह्वान पर गुरुवार को कृषि उपज मंडी में किसानों की आम सभा हुई। फसल बीमा क्लेम, सिद्धमुख नहर में पानी व स्मार्ट मीटर के विरोध में हुई सभा के बाद किसानों ने बाजार से होते हुए एसडीएम कार्यालय तक पैदल मार्च निकाल कर प्रदर्शन किया। किसान नेता सुनील पूनिया ने बताया कि रबी 2017 का बीमा क्लेम किसानों का नहीं दिया, जबकि रबी 2018 में पटवार मंडल गलत भरने व बैंकों की गलती के कारण किसान क्लेम से वंचित रह गए। खरीफ 2021 का क्लेम 750 करोड़ बना और किसानों को 250 करोड़ देकर 500 करोड़ सेटेलाइट के नाम पर खा गए। सरकार अब सेटेलाइट से क्लेम के निर्धारण को सही मान रही है और क्रॉप कटिंग से क्लेम देने से मना कर रही। खरीफ 2022 का क्लेम सिद्धमुख तहसील व राजगढ़ के कई पटवार मंडलों का नहीं आया है, उसका फैसला भी राज्य के पास लंबित पड़ा है। खरीफ 2023 तथा रबी 2023 व 2024 का क्लेम भी अभी तक नहीं आया है। जब तक किसानों को बकाया क्लेम नहीं दिया जाएगा, आंदोलन व संघर्ष जारी रहेगा। किसानों की सभा के बाद पैदल मार्च निकाला गया, जो मुख्य मार्गों से होते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंचा, जहां प्रदर्शन कर अधिकारियों से वार्ता की गई। वार्ता के दौरान सिद्धमुख नहर एईएन विकास महला ने बताया कि 12 से 20 जनवरी तक पानी छोड़ा जाएगा। पानी चोरी को रोकने के लिए गश्त बढ़ाई जाएगी। किसानों को पानी चोरी की सूचना मिलती है, तो प्रशासन को सूचना दें, ताकि कार्रवाई की जा सके। श्रमिक विभाग के खेमचंद ने बताया कि छह अक्टूबर 2018 से सुकन्या विवाह योजना के लिए नए आवेदन लेने सरकार ने रोक रखे हैं, अभी इस वर्ष 989 नए श्रमिक कार्ड बनाए गए हैं। पूनिया ने बताया कि 13 जनवरी को बकाया बीमा क्लेम के मामले के निस्तारण के लिए जयपुर में डीजीआरसी की बैठक होगी, उसमें अगर सही फैसला नहीं हुआ तो 23 फरवरी को किसान वापस सड़क पर आकर आंदोलन करेगा। इस मौके पर नरेंद्र पूनिया हमीरवास, कृष्ण भोजाण, राजकुमार भोजाण, राजेंद्र ढाका, रामनिवास, सूबेदार राजपाल पूनिया, कुलदीप, दिनेश धानोठी, सुरेंद्र, राजेश, दीवान, नवीन, मुकेश दुग्गल, राजेंद्र खुड़ी, जयसिंह, राजवीर, मनोहर, रामनिवास सुथार, श्योलाल महलाना, रवि ढाका, संदीप, रामजीलाल रबुडी, जगदीश पाबासी, संदीप सिवाच आदि मौजूद रहे।