जालोर में सीएमएचओ डॉ. भैराराम जाणी ने अजमेर की एक फर्म राज एजेंसी को फायदा पहुंचाने के लिए सारे नियम तोड़ दिए। पहले नियमों के खिलाफ जाकर चहेती फर्म को टेंडर दिया। इसके बाद सरकारी अस्पतालों में जांच के काम आने वाले उपकरण और किट 2 से 3 गुना ज्यादा कीमतों पर खरीदे। 7 रुपए का प्रेग्नेंसी टेस्ट किट 25 रुपए में खरीदा। 10 हजार रुपए के हीमोग्लोबिन मीटर के 28 हजार रुपए चुकाए। 3750 रुपए का ग्लूकोमीटर 9500 रुपए में खरीदा। इस एक टेंडर से सरकार को 50 लाख रुपए का नुकसान पहुंचा। आरटीआई में सामने आए दस्तावेजों से समझिए कैसे जालोर में दूसरे जिलों के मुकाबले ज्यादा कीमत पर खरीद की गई। प्रेग्नेंसी टेस्ट किट की डिलीवरी और निर्माण में गड़बड़ी
जालोर में प्रेग्नेंसी टेस्ट किट 31 मार्च 2025 को सप्लाई करना बता दिया जबकि जो आइटम सप्लाई किए गए, उनमें मैन्युफेक्चरिंग डेट ही मई 2025 है। गड़बड़ी सामने आने के बाद रजिस्टर में कांट-छांट कर सप्लाई की तारीख 10 मई 2025 कर दी गई जबकि इसका बिल मार्च में ही लगा दिया गया था। नियमों के खिलाफ टेंडर प्रक्रिया
जालोर सीएमएचओ डॉ. भैराराम जाणी ने सीमन विश्लेषण परीक्षण किट के खरीद की श्रेणी में टेंडर के लिए विभाग से अनुमति ली थी। लेकिन खरीद में आयोडीन टेस्ट किट, मलेरिया टेस्ट किट, डेंगू टेस्ट किट, एचआईवी किट सहित 45 आइटम शामिल कर लिए। जालोर CMHO ने 12 मार्च 2025 को जैम/2025/b/6052077 संख्या से एक टेंडर निकाला। 45 तरह के आइटम की खरीद के लिए अलग-अलग फर्म को टेंडर के लिए बुलाया। सारी प्रक्रिया के बाद टेंडर अजमेर की एक फर्म को दिया। नियम है कि जो आइटम जैम पोर्टल पर सामान्य श्रेणी में उपलब्ध हों, उनका टेंडर जारी नहीं कर सकते। टेंडर में शामिल अधिकतर जांच किट जैम पोर्टल पर उपलब्ध थे। सीएमएचओ जाणी ने सीमन विश्लेषण परीक्षण किट की खरीद की आड़ में विभाग को गुमराह किया। बिना प्रमाण पत्र फर्म को बना दिया पात्र
इस टेंडर प्रक्रिया में OEM द्वारा अधिकृत विक्रेता ही भाग ले सकता था। अधिकृत विक्रेता का प्रमाण पत्र टेंडर के साथ लगाना था। लेकिन सीएमएचओ ने सभी आइटम में प्राधिकृत विक्रेता होने के प्रमाण पत्र को अपलोड करवाए बिना ही उक्त फर्म को योग्य घोषित कर दिया। जबकि इस निविदा में शर्त रखी गई थी कि विक्रेता को ओईएम प्राधिकरण प्रमाण पत्र, गैर-दोषसिद्ध प्रमाण पत्र अपलोड करने होंगे। टेंडर लेने वाली कंपनी ने सिर्फ 15 आइटम के प्रमाण पत्र अपलोड किए। इसके बावजूद इस फर्म को योग्य घोषित कर कार्यादेश जारी कर दिया। टेंडर प्रक्रिया से पहले ही मांगे सैंपल
जैम टेंडर की शर्त के अनुसार तकनीकी व वित्तीय मूल्यांकन होने के बाद न्यूनतम बोलीदाता फर्म से ही नमूने मांगे जा सकते हैं। निविदा के साथ या प्रक्रिया के बीच सैंपल की मांग नहीं की जा सकती। सीएमएचओ जाणी ने नियमों के खिलाफ टेंडर भरने के साथ ही सैंपल की मांग की। ऑनलाइन की जगह ऑफलाइन टेंडर
जालोर में 3 लाख 41 हजार 400 यूरिन स्ट्रिप सप्लाई होने थे। फर्म ने 2 लाख 27 हजार 600 ही सप्लाई किए, यानी 1 लाख 13 हजार 800 स्ट्रिप की सप्लाई कम मिली। इससे सरकार को 6 लाख 37 हजार 280 रुपए का नुकसान हुआ। इस संबंध में जब जांच की गई तो सामने आया कि सीएमएचओ ने जैम पोर्टल पर टेंडर प्रक्रिया को पूरा नहीं कर ऑफलाइन कार्यादेश जारी किया था। इस तरह से टेंडर देना नियमों के खिलाफ है। फर्म की शिकायत पर हुई थी जांच
दरअसल, इस टेंडर में भाग लेने वाली एक फर्म मै. वर्षा एजेंसी शिवगंज ने इस टेंडर में गबन की शिकायत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं जयपुर के वित्तीय सलाहकार से की थी। इस पर तीन सदस्यों की जांच कमेटी बनाई गई थी। इसमें जोधपुर जोन के दल प्रभारी AAO प्रथम भवानीसिंह गौड़, AAO द्वितीय गोपाल सिंवर और कनिष्ठ लेखाकार जयसिंह शामिल थे। इस कमेटी ने सितंबर 2025 में अपनी जांच कर रिपोर्ट अधिकारियों को सौंपी थी।
