‘रामजल सेतु लिंक प्रोजेक्ट’में अवाप्त जमीनों का मुआवजा उठाने के लिए फर्जी वारिस तैयार करने और सरकारी जमीनों को खातेदारी करके बेचने का खुलासा हुआ है। भास्कर पड़ताल में आया कि कोटा व बूंदी में भूमाफिया अधिकारियों की मिलीभगत से अवाप्त होने वाली गैरखातेदारी जमीनों को चिह्नित करते हैं, फिर रिकॉर्ड में फर्जी वारिस बनाते हैं। नैनवां तहसील में भूमि अवाप्ति की अधिसूचना अप्रैल 2025 में आई, लेकिन जमीनें फरवरी में ही खरीदी गईं। अरनेठा गांव की जमीन (खसरा 958199, रकबा 1.6180 हे.) रिकॉर्ड में फुसी के नाम (गैरखातेदार) दर्ज है। तहसीलदार ने 10 फरवरी को फुली के नाम खातेदारी में बदलने का आदेश दिया। 11 फरवरी को फुली के नाम खातेदारी चढ़ा दी। इसी दिन उसी उपतहसील के कनिष्ठ लिपिक राहुल डडवाडिया को बेची गई। राहुल और मयंक ने जमीनों (2.1482 हेक्टेयर) को बैंक में रहन रखकर 12 लाख का कृषि लोन ले लिया। तीन उदाहरणों से समझें फर्जीवाड़े का खेल, कोटा और बूंदी में बंटना है 40 करोड़ का मुआवजा पीपल्दा में हेतराम बना भैरू का वारिस पीपलदा समेल में जमीन (खसरा नं. 256) भैंरुलाल की खातेदारी जमीन थी। जमीन ईआरसीपी में आने पर हेतराम गोचर ने फर्जी दस्तावेज से खुद को भैंरुलाल का वारिस बना दिया। नामांतरण 2 मई को (नामा सं. 432) को हुआ, जबकि हेतराम का इस परिवार से कोई रिश्ता नहीं है। पटवारी जगदीश, सरपंच मूलचंद ने मदद की। हेतराम ने फर्जीवाड़े से 37 लाख मुआवजा उठा लिया। 12 घंटे में सरकारी खातेदारी, बिक भी गई नैनवां के अरनेठा की जमीन (खसरा 959/199) तीजू और वारिसों के नाम है। तीजू की मौत वर्ष 2012 में हुई। 13 फरवरी 2025 को मृत्यु प्रमाण पत्र बना। 14 फरवरी को तहसीलदार ने जमीन को खातेदारी कर दी। 19 फरवरी को जमीन मृतका तीजू समेत वारिसों के नाम हो गई। 12 घंटों में इस जमीन का 39/119 हिस्सा मयंक डडवाडिया को बेचा और नामांतरण खुल गया। पीपलदा समेल के मामले में वसूली प्रकिया शुरू कर दी है। एफआईआर दर्ज करवाई गई है। दोषियों पर कानूनी कार्रवाई होगी। – दीपक महावर, वैौगेद एसडीएम एवं भूमि अवाप्ति अधिकारी मुझे ज्वॉइन करें ज्यादा समय नहीं हुआ, लेकिन अरनेठा का प्रकरण ध्यान में है। कलेक्टर की तरफ से जांच चल रही है। जांच के बाद वे ही निर्णय करेंगे। – भागचंद रैगर, नैनवां एसडीएम