जालोर में 23 साल की साध्वी करीब 7 डिग्री टेम्प्रेचर में 108 मटकों के ठंडे पानी से जलधारा तपस्या कर रही हैं। रोज सुबह 5 बजे शुरू होने वाली यह तपस्या 2 घंटे चलती है। तपस्या का मंगलवार को चौथा दिन था। तपस्या के दौरान ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करती है। इन मटकों को रात को ही भरकर खुले मैदान में रखा जाता है, ताकि सुबह साध्वी अपनी तपस्या पूर्ण कर सके। जिले के भीनमाल उपखंड के क्षेमंकरी माता मंदिर के पास स्थित महाकालेश्वर धाम में साध्वी राधागिरि की तपस्या के दौरान सुबह भक्तों की भीड़ जमा हो जाती है। देखिए, साध्वी की जलधारा तपस्या… घड़ों में रात को पानी भरकर रख देते हैं
श्रीपंचदशनम जूना अखाड़ा की साध्वी राधागिरि बताती हैं- मैं बीए पास हूं। एक साल पहले भगवा धारण कर लिया था। इससे पहले ही वैराग्य में रही, श्रीपंचदशनम जूना अखाड़ा में शामिल हुई। इसके बाद से महाकालेश्वर धाम के नवीन गिरि महाराज जुड़ी। 3 जनवरी से जलधारा तपस्या का संकल्प लिया और यह 14 जनवरी तक चलेगी। साध्वी राधागिरि कहती हैं- इस तप के लिए मैं 4 बजे उठ जाती हूं। सुबह 5 बजे यह साधना शुरू हो जाती है। सुबह 7 बजे तक पानी की धारा के बीच लगातार ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करती रहती हूं। इस बीच पानी से भरे 108 घड़े एक-एक करके डाले जाते हैं। इन घड़ों को रात में ही भरकर रख दिया जाता है। साध्वी राधागिरि कहती हैं कि भगवान के प्रति आस्था जगाना और इंद्रियों को वश में करना ही तपस्या का मुख्य उद्देश्य है। महाकालेश्वर धाम के नवीन गिरि महाराज ने बताया कि साध्वी राधागिरि की तपस्या जनकल्याण के लिए है। ऐसी तपस्या संतों को करनी चाहिए। राधागिरि को यह तपस्या निरंतर जारी रखनी चाहिए।