प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित भर्ती एजेंसी आरपीएससी में वर्षों से चल रहे भ्रष्टाचार की परतें ईडी की चार्जशीट में एक-एक कर खुल रही हैं। पेपर लीक में गिरफ्तार किए गए आयोग के निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा ने ईडी से हुई पूछताछ में खुलासा किया है कि इंटरव्यू में अभ्यर्थियों को पास कराने की सिफारिशें आती थीं और मोटी रकम लेकर ‘अधिकारियों का चयन’ होता था। चार्जशीट में कटारा के खुलासे बताते हैं कि सभी सदस्य और चेयरमैन सिफारिशें शेयर करते थे और पैसा सिफारिश लाने वाला लेता था। इधर, ईडी ने चार्जशीट पेश की तो कटारा ने खतरे की आशंका जताई। ऐसे में कोर्ट ने कटारा को जिला जेल से सेंट्रल जेल जयपुर में शिफ्ट करने के आदेश दिए हैं।कैसे आरपीएससी में पैसा लेकर इंटरव्यू में पास कराने का धंधा चल रहा था, पढ़ें भास्कर में ईडी की चार्जशीट के अंश…। ईडी से कटारा बोला—कुछ बड़े लोगों ने सीधे तौर पर मुझसे संपर्क किया था ईडी: आरपीएससी सदस्य रहने के दौरान भर्तियों में सिफारिश के लिए किन लोगों ने संपर्क किया था? कटारा: इंटरव्यू में अभ्यर्थियों को ‘अनुचित लाभ’ पहुंचाने के लिए कई लोगों ने संपर्क किया था। इसके लिए मुझे पैसे भी मिले थे। हालांकि मुझे किन-किन लोगों ने कितना पैसा दिया था, यह याद नहीं है। कुछ ‘बड़े लोगों’ ने भी इंटरव्यू में मदद के लिए कहा था, लेकिन इनसे मुझे पैसा नहीं मिला। ईडी: ‘इन बड़े लोगों’ द्वारा किन परीक्षाओं के इंटरव्यू में लाभ देने का संदेश मिला था? इसके बदले आपने कितनी राशि ली थी? कटारा: इन लोगों ने कई बार इंटरव्यू में सहयोग के लिए संदेश भेजे थे, मगर कोई धनराशि मैंने नहीं ली थी। ईडी: आपको अन्य सदस्य या चेयरमैन द्वारा अनुचित लाभ देने का आदेश मिला था? कटारा: चेयरमैन और सदस्यों को इंटरव्यू में मदद के लिए ‘बड़े लोगों’ द्वारा अभ्यर्थी का फोटो और इंटरव्यू लेटर भेजा जाता था। चेयरमैन या संबंधित सदस्य इस मैसेज को बाकी सदस्यों में इंटरव्यू से पहले साझा करते थे। ईडी: आपने बताया कि विशेष अभ्यर्थी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए दूसरे सदस्यों में मैसेज का आदान-प्रदान करते थे, इसके बारे में बताएं? कटारा: आरपीएससी चेयरमैन या सदस्यों को इंटरव्यू में मदद के लिए अभ्यर्थी की डिटेल मोबाइल पर भेजी जाती थी। सभी सदस्य डायनिंग हॉल में बैठते थे और मैसेज के बारे में जानकारी देते थे। साथ ही मदद के लिए कहा जाता था। सभी एक-दूसरे की मदद करते भी थे। जिस सदस्य या चेयरमैन का अभ्यर्थी होता था, वही व्यक्ति उस अभ्यर्थी से पैसा लेता था। ईडी: जब आप सदस्य थे, तब कौन-कौन सदस्य व चेयरमैन रहे? किस-किस ने आपको खास अभ्यर्थी को लाभ पहुंचाने के लिए कहा था? कटारा: मेरे सदस्य रहने के दौरान डॉ. भूपेन्द्र यादव, डॉ. शिवसिंह राठौड़, डॉ. जसवंत सिंह राठी और संजय क्षेत्रिय अध्यक्ष रहे। मेरे सदस्य बनने के दौरान डॉ. शिवसिंह राठौड़, राजकुमारी गुर्जर, रामूराम रायका, डॉ. जसवंत सिंह राठी और दो अन्य सदस्य थे। लाभ से जुड़े सवाल की पूरी डिटेल चार्जशीट में मौजूद है। ईडी: क्या आपको किन प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र तैयार करने और इंटरव्यू लेने की जिम्मेदारी आरपीएससी चेयरमैन द्वारा दी गई थी? कटारा: इसकी पूरी जानकारी आरपीएससी चेयरमैन की गोपनीय शाखा से मिल सकती है। हालांकि मुझे इस बारे में कोई जानकारी याद नहीं है। ईडी: आरपीएससी द्वारा आयोजित होने वाली परीक्षाओं के लिए तैयार किए जाने वाले प्रश्न पत्र की क्या एसओपी है?कटारा: मेरी जानकारी में विभिन्न परीक्षाओं के पेपर तैयार करने की जिम्मेदारी आरपीएससी में नियुक्त मुख्य परीक्षा नियंत्रक की होती है, जो सीधे चेयरमैन की गोपनीय शाखा द्वारा तैयार कराने की जिम्मेदारी निभाता है। चेयरमैन द्वारा स्वयं दायित्वों का निर्वहन न कर अलग-अलग सदस्यों को पेपर बनाने की जिम्मेदारी गोपनीय व लिखित आदेश के द्वारा सौंपी जाती है। इसके बाद आरपीएससी की गोपनीय शाखा से विषय विशेषज्ञों की पैनल सूची आरपीएससी में सदस्यों द्वारा नियुक्त विषय विशेषज्ञ समन्वयक के माध्यम से लाई जाती थी। आरपीएससी की रिसर्च शाखा की ओर से विशेषज्ञों को पेपर बनाने की गाइडलाइन का फोल्डर बनाकर समन्वयक को दिया जाता था। उसी में पेपर बनाने की विस्तृत गाइडलाइन होती थी। समन्वयक उस गाइडलाइन को लिफाफे में बंद कर विशेषज्ञों को स्पीड पोस्ट से भेजता था। एक माह में पेपर तैयार कर स्पीड पोस्ट द्वारा भेजे जाते थे। पेपर मिलने के बाद अलग-अलग विषय विशेषज्ञों को बुलाकर दो-तीन राउंड में दो से तीन पेपर फाइनल करने के बाद लिफाफे में बंद कर चेयरमैन को सौंप दिए जाते थे। सदस्य बनने के लिए 1.20 करोड़ घूस देने की जांच शुरू बाबूलाल कटारा को आरपीएससी का सदस्य बनाने के बदले 1.20 करोड़ की डील की जांच एसओजी ने शुरू कर दी है। 30 दिसंबर के अंक में भास्कर ने खुलासा किया था—‘कटारा ने ईडी में बयान दिया है कि आरपीएससी मेंबर बनने के लिए 1.20 करोड़ रुपए दिए थे’। इसके बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मामले की एसओजी से जांच के आदेश दिए थे। गौरतलब है कि कटारा ने आरपीएससी सदस्य बनने की डील से लेकर आरपीएससी के सदस्यों व चेयरमैन द्वारा इंटरव्यू के समय की जाने वाली सिफारिशों के बारे में बड़े खुलासे किए थे। एसओजी अब बाबूलाल कटारा और उनके बेटे से संभवतः अगले सप्ताह पूछताछ करेगी। कटारा अभी जेल में हैं।
