प्रदेश में 20 करोड़ से बनी 7 खाद्य सुरक्षा लैब 30 माह से बंद पड़ी हैं। सभी में कारण स्टाफ और उपकरणों की कमी है। नतीजा यह है कि प्रदेश में खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच समय पर नहीं हो पा रही और इसी कारण मिलावटी सामग्री बाजार में धड़ल्ले से बिक रही है। इन सात में से एक लैब बाड़मेर शहर के लालाणियों की ढाणी में 1.19 करोड़ रुपए लागत से बनी हुई है, लेकिन यह भी 30 माह से बंद है। इसके उपकरणों पर करीब 1.80 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। लैब बंद होने से खाद्य पदार्थों के नमूने जोधपुर लैब भेजे जा रहे हैं। जोधपुर लैब में भी हर माह सैंपलों की जांच एक-एक माह बाद हो रही है। सरकार की ओर से 2020-21 में प्रदेश में एक साथ 7 लैब स्वीकृत की गई थीं। सभी बनकर तैयार हैं, लेकिन मैनपावर व उपकरणों की कमी से पिछले ढाई साल से बंद हैं। प्रदेश में बाड़मेर, भीलवाड़ा, सीकर, धौलपुर, श्रीगंगानगर, बारां और नागौर में लैब की बिल्डिंग बनने के साथ कुछ उपकरण पहुंच चुके हैं, लेकिन शुरू नहीं हुई हैं। वर्ष 2020-21 की लैब तो बंद ही हैं और सरकार ने 2025-26 में 7 और लैब की घोषणा की है। जोधपुर लैब पर आठ जिलों से पहुंच रहे सैंपल, ट्रेनी एनालिस्ट कर रहे हैं जांच प्रदेश में 11 लैब थीं। इनमें से चूरू व जालोर लैब बंद हैं। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, अजमेर, कोटा, बीकानेर, भरतपुर, बांसवाड़ा व अलवर में सैंपलों की अधिकता के चलते करीब हर माह एक्सटेंशन लेटर निकाले जा रहे हैं। इन सभी लैबों पर भी केवल 40 फीसदी ही स्टाफ है। सबसे खस्ता हाल जोधपुर लैब के हैं। यहां 8 जिलो बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर, फलोदी, सिरोही, पाली, जालोर व जोधपुर—के सैंपल पहुंच रहे हैं। ऐसे में जांच समय पर नहीं हो रही है। जोधपुर लैब में न तो फूड एनालिस्ट है और न ही लैब टेक्नीशियन। बांसवाड़ा लैब पर कार्यरत फूड एनालिस्ट को अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। 3 ट्रेनी एनालिस्ट से काम चलाया जा रहा है। लैब पर 17 कार्मिक हैं, जिनमें 70 प्रतिशत अस्थायी हैं। प्रदेश पूरे में एक मुख्य खाद्य विश्लेषक और केवल 10 खाद्य विश्लेषक ही कार्यरत हैं। रिपोर्ट आने से पहले बिक गया सामान • 14 मार्च को गुरु कृपा किराणा स्टोर, सेड़वा से घी का सैंपल लिया गया। दूसरे दिन सैंपल जोधपुर लैब भेजा गया। रिपोर्ट में देरी हुई और दुकान से घी बिक गया। • 24 अप्रैल को बाड़मेर शहर के शास्त्रीनगर में एमडी प्रोडक्ट दुकान से बच्चों के खाने की पेप्सी (आइस लॉली) का संदेह के आधार पर सैंपल लिया गया, लेकिन रिपोर्ट आने से पहले ही बिक गया। • पिछले साल मौखाब में हिंगलाज स्वीट एंड केटर्स से कलाकंद का सैंपल लिया गया। रिपोर्ट में सैंपल फेल रहा, लेकिन रिपोर्ट आने से पहले पूरा बिक गया। • पिछले साल चौहटन में महादेव दूध डेयरी से पनीर का सैंपल लिया गया। रिपोर्ट आने से पहले पूरा बिक चुका था और जब रिपोर्ट आई तो सैंपल फेल निकला। “प्रदेश में वर्ष 2020-21 में स्वीकृत लैब तैयार हैं। उपकरणों के लिए 1170 करोड़ रुपए आरएमएससीएल को ट्रांसफर किए गए हैं। 26 आइटम के टेंडर प्रोसेस में हैं। मैनपावर की प्रक्रिया भी प्रोसेस में है। जल्द भर्तियां निकाली जाएंगी।” — डॉ. विजय प्रकाश शर्मा, संयुक्त आयुक्त, औषधि नियंत्रण, जयपुर
