लुधियाना ससराली कॉलोनी में प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। ससराली कॉलोनी में पिछले लंबे समय से चल रहा संयुक्त धरना उस समय एक नया मोड़ पर पहुंच गया। जब शहर से आए युवाओं की टोली ने ग्रामीणों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का ऐलान कर दिया। युवाओं ने स्पष्ट कहा कि अब और इंतजार नहीं अगर सरकार पीछे हटती है तो हम खुद बांध बनाएंगे। गौरतलब है कि यह मांग नई नहीं है। पिछले साल सतलुज के बढ़ते जलस्तर ने इस पूरे इलाके में भारी तबाही मचाई थी। उस समय भी प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं ने पक्का बांध और धुस्सी बाँध की मजबूती का भरोसा दिया था। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सिर्फ कागजी खानापूर्ति होती है। गांव के लोगों अपनी चुप्पी तोड़कर बाहर निकले ग्रामीणों का आरोप है कि पिछली बार आई बाढ़ के दौरान करोड़ों की फसलें बर्बाद हो गईं और कई घरों में दरारें आ गईं जिसका मुआवजा आज भी अधर में लटका है। सनेवाल हल्के के लोगो का कहना है कि ड्रेनेज विभाग ने कई बार सर्वे किया लेकिन बजट का बहाना बनाकर काम शुरू नहीं किया गया। धरने को संबोधित करते हुए आयोजकों ने तीखी अपील की। उन्होंने कहा अब समय आ गया है कि गांव की महिलाएं और पुरुष अपनी चुप्पी तोड़कर बाहर निकलें। यह किसी एक परिवार की नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा की लड़ाई है। शहर से पहुंचे युवाओं के समर्थन ने बुजुर्गों में भी जोश भर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार के झूठे आश्वासनों का घड़ा अब भर चुका है। 10 तारीख आर-पार की जंग धरना नेताओं ने पंजाब सरकार और स्थानीय प्रशासन को 10 जनवरी तक का अल्टीमेटम दिया है। अगर 10 तारीख तक बांध निर्माण के लिए ठोस मशीनरी जमीन पर नहीं उतरी तो ग्रामीण चंदा इकट्ठा कर और श्रमदान के जरिए खुद बांध का निर्माण शुरू कर देंगे। इसके बाद होने वाली किसी भी प्रशासनिक अड़चन की जिम्मेदारी सरकार की होगी। आयोजकों ने सनेवाल हल्के के सभी प्रभावित गांवों के बुजुर्गों और युवाओं से अपील की है कि वे भारी संख्या में ससराली धरने पर पहुंचें। उन्होंने कहा कि अगर आज एकजुट नहीं हुए तो अगली बरसात फिर से तबाही लेकर आएगी।
