अरावली की नई परिभाषा को लेकर छिड़े विवाद पर केंद्र सरकार ने साफ किया है कि वह इस क्षेत्र में नए खनन पट्टे जारी नहीं करेगा, बल्कि इसका संरक्षित क्षेत्र बढ़ाया जाएगा। इस फैसले से अलग राजस्थान अरावली के ‘वन क्षेत्र’’ में ही धड़ल्ले से अवैध खनन हो रहा है। जिसको नई परिभाषा में भी नहीं छेड़ा गया था। वन विभाग की ओर से 2 दिन पहले राज्य सरकार को भेजी रिपोर्ट में बताया गया है कि ‘अरावली में पहले से अवैध माइनिंग हो रही है। दो साल में ही 19 जिलों में फैली अरावली में 1478 अवैध माइनिंग के केस रजिस्टर्ड (2024 में और 2025 में अब तक 530) किए गए हैं।’ केवल इसके पेटे 4.12 करोड़ की वसूली हो पाई है। चिंता की बात यह है कि वन क्षेत्र में यह अवैध खनन टाइगर रिजर्व तक में हो रहा है। वन विभाग इसको रोकने में अभी तक नाकाम रहा है, केवल कुछ मामलों में जुर्माने किए गए हैं। अरावली के 19 जिलों में प्लांटेशन
1. अरावली वर्तमाला के जीर्णोद्धार के लिए इसी साल 250 करोड़ के बजट की घोषणा की गई। इस योजना से संबंधित 19 जिलों में तीन साल (2025-26 से 2027-28) तक 28,500 हेक्टेयर में वृक्षारोपण कराना प्रस्तावित है। इसके लिए 11 नई नर्सरियों के साथ जल एवं मृदा संरक्षण कार्य प्रस्तावित हैं। 2025-26 में 3700 हे. में मिट्‌टी के काम, 160 जल-मिट्‌टी संरक्षण संरचनाओं के लिए 27.61 करोड़ का बजट भी आवंटित है। 2. 38000 हेक्टेयर में प्लांटेशन वित्तीय वर्ष 2024-25 में वन विभाग की राज्य योजना, कैंपा, एफडी एवं जलवायु परिवर्तन योजनाओं में 38009 हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण कराया गया। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग की विभिन्न योजनाओं में 31705 हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण कराया गया। इस वित्तीय वर्ष 2025-26 में 34331 हे. क्षेत्र में अग्रिम मृदा कार्य प्रगति पर हैं, जिसमें आगामी मानसून 2026 में वृक्षारोपण होगा। “रणथंभौर वगैरह में कार्रवाई कर रहे हैं, प्रभावी रोकथाम के लिए अतिरिक्त पुलिस सहायता भी मांगी है। कुछ सेंसेटिव एरियाज में चौकियां वगैरा भी बना रहे हैं, ताकि इस पर सख्ती से रोक लगाई जा सके।”
-आनंद कुमार एसीएस, वन एवं पर्यावरण