राजस्थान पंचायतीराज अधिनियम, 1994 की धारा-8क एवं ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग का परिपत्र क्रमांक 728 दिनांक 24 नवंबर 2015 के अनुसार बीते 10-12 सालों से की जा रही ग्राम सभाएं अपने मूल स्वरूप से भटक चुकी हैं। संवैधानिक व्यवस्था का खुला उल्लंघन हो रहा। राज्य में 7 दिनों में एकल एजेंडे की 3 ग्राम सभाएं निर्धारित की गईं। दो हो चुकी, एक शुक्रवार को होगी। प्रावधान यह हैं अब यह हो रहा है “आए दिन एकल एजेंडे की ग्राम सभाओं से कराने से महत्व कम हो गया है। ऐसे में सरकारी दबाव में खानापूर्ति करनी पड़ रही है। एकल एजेंडे की ग्राम सभाएं बंद की जानी चाहिए।” -महावीर शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष, राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ