एसआईआर में करीब 41.85 लाख नाम कट चुके हैं। 11 लाख मतदाताओं को दस्तावेज प्रस्तुत करने हैं। एसआईआर पर हुए कामकाज पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन से बांग्लादेशी, रोहिंग्या आदि के नाम कटने और दूसरे राज्यों से तुलनात्मक आंकड़े व हालातों पर बातचीत- कुछ राज्यों में नाम कटने पर विवाद हुआ, यहां शांति है, कैसे मैनेज किया? दूसरे राज्यों में नाम कटने की बात करें तो यह आंकड़ा बड़े राज्यों पश्चिम बंगाल, बिहार, एमपी आदि के आसपास ही है। जिस तरह से एसआईआर के तहत हमारा आंकड़ा 7.65 प्रतिशत है, वहां भी लगभग इतना ही है। वहां भी वोटर को पूरा मौका मिला है और यहां भी दिया जाएगा। SIR में आगे क्या रहेगा? 15 जनवरी तक सभी योग्य मतदाताओं से दावे और आपत्तियां प्राप्त कर रहे हैं। निस्तारण 7 फरवरी तक हो जाएगा। जिनकी मैपिंग नहीं हो पाई है, उन्हें नोटिस जारी करके बुलाया जा रहा है। 14 फरवरी को वोटर लिस्ट का अंतिम प्रकाशन करेंगे। 41.85 लाख नाम काटने का बड़ा आंकड़ा है, यानी सिस्टम में खामी है? एसआईआर अभियान में अपनाई गई प्रक्रिया सामान्य तौर पर चलने वाली प्रक्रिया से पूरी तरह से अलग है। ऐसे में इस तरह का फर्क आना सामान्य और स्वाभाविक रहता है। बीएलओ में नाराजगी हुई थी, अब कितनी है? बीएलओ समेत सभी कर्मचारियों ने अच्छा काम किया है। इनकी अच्छी वर्किंग पर जिलेवार इनका सम्मान भी किया गया है। अब नाराजगी जैसी कोई बात नहीं है। प्रपत्र वितरण, मैपिंग के लिए नंबर वन बनने का दावा किया गया, ये कैसे? भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों पर हमने अनुमान लगाया था कि राजस्थान का नंबर बिहार के बाद अगले चरण में आएगा। ये अनुमान सही साबित हुआ। इसलिए तभी से हमने तैयारी शुरू कर दी थी। बीएलओ ने ये काम बखूबी किया। एसआईआर की अधिसूचना जारी होने तक 70 प्रतिशत मैपिंग का कार्य किया जा चुका था। कार्यों की टेंडरिंग तक हो गई थी। इसके बाद बीएलओ समेत सभी ने अच्छा काम किया। घुमंतू केसों में मैपिंग नहीं हुई, नाम कटेंगे क्या? महाजन: दस्तावेज प्रस्तुत करने पर नाम नहीं कटेंगे। आयोग ने 12 दस्तावेज तक मान्य कर रखे हैं।